ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी जो उस समय मेजर थे, वह मोर्चे को लीड कर रहे थे, जिसमें 23 पंजाब यूनिट के 120 सैनिक थे। पाक सेना की संख्या ज्यादा होने के कारण कमांडर का संदेश आया कि कंपनी को पीछे हटाकर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जाए। मेजर चांदपुरी ने पीछे हटने से मना करते हुए कमांडर को कहा कि उनका एक-एक जवान आखिरी गोली और अंतिम सांस तक पाक सेना का मुकाबला करेगा।
उनकी पूरी टीम 2 हजार पाक सैनिकों का पूरी रात मुकाबला करती रही और सुबह होने तक दुश्मन के 38 पैटन टैंक और कई बख्तरबंद गाड़ियों को ध्वस्त कर दिया। इस तरह एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी ने भारत-पाक युद्ध की जीत की नींव रखी। 1971 के युद्ध जीतने की खुशी में पाक सेना के टैंक पर मेजर कुलदीप चांदपुरी अपने साथियों सहित चढ़कर नाचे थे, वही तस्वीर एक यादगार बन गई थी, उस टैंक पर मेजर चांदपुरी के साथ नाचने वाले 23 पंजाब रेजीमेंट के पूर्व सैनिक आज 47 वर्षो के बाद लौंगेवाला युद्ध स्मरण समारोह में झूमकर नाचे तथा वर्षों बाद मिले अपने साथियों के साथ युद्ध के अनुभव साझा किया।
शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा महासचिव के सचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि सारा देश दिसंबर महीने भारत-पाक युद्ध की जीत का जश्न विजय दिवस के रुप में मनाता है, उस युद्ध में 23 पंजाब रेजीमेंट के 120 जवानों ने 2 हजार पाक सैनिकों को धूल चटाते हुए बहादुरी का जो इतिहास रचा था, उसकी मिसाल अन्य कहीं मिलती। इस यूनिट के शौर्य को लेकर निर्देशक जेपी दत्ता ने बार्डर फिल्म बनाई थी। फिल्म ब्रिगेडियर कुलदीप चांदपुरी का रोल अभिनेता सन्नी दियोल ने निभाया था।
समारोह में इन्हें किया गया सम्मानित
समारोह में शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया अशोक चक्र के पिता कर्नल प्रभात जसरोटिया, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया के भतीजे सूबेदार कर्ण सिंह, शहीद लेफ्टीनेंट गुरदीप सलारिया के पिता रिटायर्ड कर्नल सागर सिंह सलारिया व उस युद्ध में हिस्सा लेने वाले सैनिकों को शाल भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर रिटायर्ड डीआईजी पीएस पंधेर, कर्नल हरचरण सिंह, कैप्टन प्रकाश सिंह, सूबेदार चमकौर सिंह, सूबेदार सागर सिंह, सूबेदार जरनैल सिंह, कर्नल उजागर सिंह, नायक मलूक सिंह, नायक उज्जल सिंह, हवलदार गुरमीत सिंह, हवलदार बलवंत सिंह, मेजर सिंह लोका, राजपूत महासभा लोकसभा हलका गुरदासपुर के प्रधान कुंवर संतोख सिंह, परिषद के प्रैस सचिव बिट्टा काटल मौजूद थे।