कारगिल युद्ध के नाम पर पाकिस्तान ने भारत की पीठ पर छुरा घोंपा था। लेकिन इस युद्ध के बहुत से सच अभी भी लोगों तक नहीं पहुंच पाएं। इस युद्ध को लेकर एक और खुलासा हुआ है। यह खुलासा खुद भारतीय खुफिया एंजेसी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुल्लत ने किए हैं। इन दिनों चंडीगढ़ में मिलिट्री लिटरेचल फेस्ट चल रहा है। सेना से जुड़े तमाम अधिकारी यहां पहुंच रहे हैं। पूर्व रॉ प्रमुख एएस दुल्लत ने बताया कि कारगिल जंग से ठीक पहले कारगिल की चोटियों में घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी गई थी।
‘विजडम ऑफ स्पाइज’ के विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए दुल्लत ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले सेना द्वारा एकत्रित किए गए सभी संकेतों और खुफिया रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री के साथ साझा की गई थी, जिनके पास उप-प्रधानमंत्री का पद भी था। बता दें कि उस समय देश के गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी थे।
इससे पहले, लेफ्टिनेंट जनरल कमल दावर ने सभी तीनों रक्षा विंगों को एक संगठित कमांड अधीन रखने की महत्ता दिखाई, जिससे फैसले लेने की प्रक्रिया आसान ढंग से बनाई जा सके। देश के ‘इंटेलिजेंस सीजर’ के तौर पर एनएसए के मौजूदा रुझान को ध्यान में रखते हुए दावर ने कहा कि सारी जानकारी उपलब्ध होना एक बात है परंतु सभी उपलब्ध साधनों पर काम करना अलग बात है।
लेफ्टिनेंट जनरल संजीव के. लौंगर ने एक संगठित कमांड के मुद्दे पर असहमति प्रकट करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में हमें एक अलग मुखियों की जरूरत है, जो मिलकर महत्वपूर्ण फैसले ले सकें।