रिसर्च पेपर में धोखाधड़ी के मामले में पीजीआई की गवर्ननिंग बॉडी (जीबी) ने फार्माकोलाजी विभाग के पूर्व एचओडी अमिताव चक्रवर्ती को दोषी मानकर उनकी निंदा की है। हालांकि प्रो. चक्रवर्ती पीजीआई से रिटायर हो चुके हैं। कार्रवाई के नाम पर अब फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। पीजीआई में रहते यदि उन्हें दोषी माना जाता तो शायद उनके प्रमोशन व अन्य लाभ प्रभावित हो सकते थे।
फिलहाल अब उनके रिकार्ड में यह दर्ज हो जाएगा। भविष्य में जब भी वे किसी इंस्टीट्यूट को ज्वाइन करते हैं तो और वह इंस्टीट्यूट पीजीआई से एनओसी मांगता है तो पीजीआई इस बात का उल्लेख जरूर करेगा। इससे उनकी नियुक्ति में अड़चन उत्पन्न हो सकती है। यह पहली बार है, जब रिसर्च में धोखाधड़ी के केस में किसी पीजीआई डॉक्टर को दोषी ठहराया गया हो।
गवर्ननिंग बॉडी की मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने की। यह मामला साल 2014 का है। जब अमिताव चक्रवर्ती फार्माकोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष थे। उन्होंने एक समीक्षात्मक पत्रिका में एक शोध प्रकाशित किया था, जिसमें दावा किया गया था कि हेल्पलाइन में एक महीने के दौरान कुल 56 कॉल आए थे, जबकि रिकार्ड के मुताबिक हेल्पलाइन में तीन वर्षों में सिर्फ एक दो कॉल ही आईं थीं।
इससे यह जाहिर होता है कि उन्होंने अपने शोध में जो डाटा प्रस्तुत किया था, उसमें उन्होंने अपने स्तर पर हेरफेर की थी।