सरकार ने 40 साल बाद पूर्व सैनिकों को उनका हक दे दिया, लेकिन इससे पूर्व जनरल वीपी मालिक नाखुश हैं। वे कहते हैं कि सरकार का फैसला मूर्खतापूर्ण है। उन्होंने सरकार के तरीकों पर भी सवाल उठाया है।
पूर्व सेना प्रमुख का कहना है कि सेना का जवान प्री मिच्योर रिटायरमेंट पेंशन सर्विस पूरी करने के बाद ही लेता है। ज्यादातर जवान प्री मिच्योर रिटायरमेंट इसलिए लेते हैं, क्योंकि उन्हें प्रमोशन नहीं मिलता है।
उन्होंने सरकार के तरीकों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घोषणा से एक दिन पहले मीडिया में सूचना लीक कर दी जाती है। प्रेसवार्ता में सरकार सिर्फ अपनी बात रखती है। किसी भी पत्रकार को सवाल पूछने का मौका तक नहीं दिया जाता है।
इससे नागरिकों और सेना के बीच संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। बता दें कि वन रैंक वन पेंशन के ऐलान से पहले आंदोलन के दौरान मलिक ने केंद्र सरकार और पूर्व सैनिकों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।