ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले में पूरे देश जो बवाल मचा हुआ है, उसके बीच इस राज्य में हुए चुनाव में बोए गए थे और आरोपों का दौर शुरू हुआ था। दरअसल, ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ के आरोपों का सिलसिला दिसंबर 2016 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के दौरान शुरू हुआ था।
दिसंबर में निगम चुनाव के बाद परिणाम आने पर कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए चुनाव आयुक्त के समक्ष हंगामा भी किया था, लेकिन उस समय कांग्रेस के साथ कोई दूसरा दल नहीं आया। चंडीगढ़ कांग्रेस ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी भी दाखिल की हुई है, जो विचाराधीन है।
इसके बाद जब पंजाब विधानसभा चुनाव में आप को उम्मीद से काफी कम सीटें मिलीं तो दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम मेें छेड़छाड़ का आरोप भाजपा पर लगाया। यूपी विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के तुरंत बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरोप लगाया और अब यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव अगले चुनाव बैलेट से करवाने की मांग कर रहे हैं।
पायलट प्रोजेक्ट चंडीगढ़ में लागू
evm mashine
कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा कि ईवीएम से छेड़छाड़ का पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले चंडीगढ़ में ही लागू किया गया था। निगम चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चंडीगढ़ भी आए थे। इस मामले में हाईकोर्ट में अर्जी विचाराधीन है।
तब कोई विश्वास नहीं कर रहा था
कांग्रेस महासचिव संदीप भारद्वाज का कहना है कि दिसंबर में निगम चुनाव के परिणाम आने के बाद वह जब ईवीएम से छेड़छाड़ की बात कह रहे थे तब कोई भी इस पर विश्वास नहीं कर रहा था लेकिन आज सभी विपक्षी दल यही बात कर रहे थे। भारद्वाज का कहना है कि भाजपा ने धोखे से निगम चुनाव जीता है।
11 बजे हार का मैसेज, 12 बजे मतगणना शुरू हुई
पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि मतगणना से पहले ही वाट्सएप्प पर मैसेज चल गया था कि वह (चावला) चुनाव हार गए हैं। 11 बजे ही मैसेज आ गया कि वह 1106 वोट से हार गए हैं, जबकि उनकी मतगणना ही 12 बजे के बाद शुरू हुई है। 1 बजे उनका परिणाम आया, जिसमें 1100 से ज्यादा वोट से हार बताई गई। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है।
नोटबंदी के बावजूद 22 में से 20 सीटें भाजपा के नाम रही थीं
EVM
दिसंबरमें चंडीगढ़ में हुए निगम चुनाव में 22 में से 20 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि उस समय नोटबंदी भी लागू थी और नोटबंदी के फैसले को भाजपा ने निगम चुनाव में आए परिणाम के साथ जोड़ते हुए जनता की सहमति बताई थी। मालूम हो कि नगर निगम में कुल 26 सीटें हैं,
जिन पर 22 पर भाजपा और 4 पर अकाली दल के उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। कांग्रेस को इस चुनाव में सिर्फ 4 सीट ही हासिल हुई थीं। जो कांग्रेस ने 4 जीती हैं, उनमें उनके तीन उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा के नहीं बल्कि अकाली दल के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा और अकाली का गठबंधन है। जबकि भाजपा के मुकाबले में कांग्रेस ने सिर्फ एक ही सीट जीती थी।
कुछ तो लोग कहेंगे : कैलाश जैन
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश चंद जैन का कहना है कि पूरे देश में पीएम मोदी और भाजपा की लहर चल रही है। पूरे देशवासी मोदी सरकार से खुश हैं। चुनाव हारने के बाद विपक्षी दलों के पास कुछ कहने के लिए नहीं है इसलिए वह ईवीएम से छेड़छाड़ के झूठे आरोप लगा रही है।