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Manmohan Singh: दिल्ली जाने के बाद भी चंडीगढ़ से जुड़े रहे पूर्व पीएम, पुनर्वास योजनाओं से दी नई पहचान

Fri, 27 Dec 2024 01:20 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का चंडीगढ़ से खास नाता रहा है। वे चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं और यहां प्रोफेसर भी रहे। उनका सेक्टर 11बी में घर भी है।  
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चंडीगढ़ में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में सत्ता के शिखर तक पहुंचने के बाद भी चंडीगढ़ से पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का गहरा जुड़ाव बना रहा। सेक्टर-11बी स्थित मकान नंबर-727, आज भी उनके नाम पर है। इसे उन्होंने 31 जनवरी 1987 में सिर्फ 8.62 लाख में खरीदा था। वह घर आज भी अपने पुराने स्वरूप में खड़ा है। 

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1997 के बाद मनमोहन सिंह ने इसमें कोई बदलाव नहीं कराया। इसके साथ उनके कार्यकाल के दौरान पुनर्वास योजनाओं में भी चंडीगढ़ को नई पहचान मिली, जिसमें धनास में झुग्गीवासियों के लिए सबसे ज्यादा 8448 फ्लैट्स सौंपे गए।

साढ़े आठ लाख में खरीदा था घर 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का चंडीगढ़ से खास नाता रहा है। दिल्ली शिफ्ट होने और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने चंडीगढ़ से नाता नहीं तोड़ा। सेक्टर-11बी में 4498.5 स्क्वायर फीट कुल एरिया का यह मकान उन्होंने 31 जनवरी 1987 को महज 8.62 लाख रुपये में खरीदा था। इस मकान को खरीदने के बाद वर्ष 1997-98 में उन्होंने मकान की पहली मंजिल बनवाई थी और इस पर करीब 8.45 लाख रुपये खर्च किए थे। अब इस मकान की कीमत 8 से 10 करोड़ रुपये के बीच है।

एस्टेट ऑफिस के रिकॉर्ड के मुताबिक आज भी यह मकान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम ही है और 100 फीसदी शेयर उनके पास है। यह मकान फ्री होल्ड है। वर्ष 2013 में इस मकान की कीमत करीब 4 करोड़ 92 लाख रुपये लगी थी। उस समय शोर था कि पूर्व प्रधानमंत्री इस घर को बेचने जा रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। पूर्व पीएम के निधन के बाद देर रात अमर उजाला की टीम उनके घर पहुंची। वह घर आज भी हू-ब-हू वैसा ही है, जैसा मनमोहन सिंह के रहने के समय था।

पत्नी का सेक्टर-7सी के सेंट्रल बैंक में खाता

पूर्व प्रधानमंत्री का चंडीगढ़ से जुड़ाव ऐसा था कि जब-जब उन्हें मौका मिला वो चंडीगढ़ जरूर पहुंचे। उनकी पत्नी का सेक्टर-7सी स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में बचत खाता है। वर्ष 2019 में राज्यसभा सांसद बनने के समय दिए हलफनामे के अनुसार उस समय इस बैंक खाते में उनकी पत्नी के नाम करीब 18 लाख रुपये भी जमा थे। सेक्टर-19ए स्थित ग्रामीण एवं औद्योगिक विकास अनुसंधान केन्द्र (क्रीड) के गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह, इसके कार्यकारी उपाध्यक्ष दिवंगत डॉ. रशपाल मल्होत्रा के बहुत करीबी थे। ऐसा कहा जाता था कि क्रीड में एक कमरा हमेशा उनके लिए आरक्षित रहता था। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री ने 2013 में शहर के कई कॉलोनियों में झुग्गी में रहने वाले लोगों को धनास में पक्के मकान की चाबी सौंपी थी, जिसे लेकर आज भी वहां के लोग उन्हें याद करते हैं।
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अपने गुरु के लिए 11 अप्रैल 2018 को पीयू आए थे डॉ. सिंह 

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 11 अप्रैल 2018 को अपने गुरु डॉ. एसबी रांगेकर के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने पहुंचे थे। यहां उनके गुरु की याद में पहले मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया था। डॉ. सिंह ने पीयू में आखिरी लेक्चर 1966 में दिया था और इसके बाद यूनिवर्सिटी छोड़ दी थी। इसके बाद दो बार पीयू पहुंचे लेकिन लेक्चर नहीं दिया था। इसके बाद उन्होंने सीधे 2018 में ही लेक्चर दिया और यहीं से पूरे देश को संदेश दे गए थे। कहा था कि दलित और अल्पसंख्यकों के खिलाफ देश में अत्याचार बढ़ रहा है। धर्म, जाति, भाषा और संस्कृति के नाम पर भारतीयों को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक नागरिक के नाते बंटवारे की नीति और राजनीति को हमें नकारना होगा। उन्होंने अपने भाषण में डॉ अंबेडकर को भी तीन बार याद किया था।

अपने फंड से पीयू को दी थी 3500 किताबें

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर पीयू में गुरु तेग बहादुर भवन में लाइब्रेरी भी बनी है। इस लाइब्रेरी के लिए डॉ सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी को अपने फंड से करीब 3500 किताबें दी हैं। इस लाइब्रेरी को पीयू के इंजीनियरिंग विंग ने एलुमनी एसोसिएशन के साथ मिलकर तैयार किया था। मनमोहन सिंह 2018 में जब पीयू आए थे तो वह कुछ देर के लिए उस जगह को भी देखने पहुंचे थे, जहां पर उनके नाम से लाइब्रेरी बन रही थी। पूर्व पीएम ने यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट के साथ फोटो भी खिंचवाई थी और उन्हें थैंक यू, गुड लक कह कर चले गए थे। जाते-जाते उन्होंने हाथ हिला कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया था।
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