चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति जारी कर दो साल बाद पेट्रोल बाइक और पांच साल में पेट्रोल-डीजल की कार (व्यावसायिक) को बंद करने का फैसला किया है। इससे पूरे शहर में हलचल मची है। प्रशासन पिछले दो सालों से लोगों को ईवी के बारे में जागरूक कर रहा है और इलेक्ट्रिक वाहन ही खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है लेकिन हैरानी की बात है कि खुद पेट्रोल और डीजल वाहन खरीद रहा है।
रजिस्टरिंग व लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन के विभिन्न विभागों ने पिछले चार साल में सिर्फ छह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे जबकि 1014 पेट्रोल-डीजल वाहनों की खरीद की। प्रशासन ने अब तक कुल 12 ईवी खरीदे हैं। एक आरटीआई में आरएलए ने बताया है कि उनके पास 3624 सरकारी गाड़ियां पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर गाड़ियां प्रशासन, नगर निगम समेत अन्य विभागों के अधिकारी, पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग व विभागों के कार्यों में लगी हुई हैं।
वर्ष 2018 से 31 मार्च 2022 के बीच आरएलए में 1014 गाड़ियां पंजीकृत हुई हैं। ये नई गाड़ियां हैं, जिन्हें विभिन्न कामों के लिए खरीदा गया था। इनमें से पेट्रोल की 551 और डीजल की 457 गाड़ियां हैं। बीते दिनों सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में ईवी नीति लांच की गई थी। इस मौके पर प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल से पूछा गया कि क्या प्रशासन भी अब नई सरकारी गाड़ियां इलेक्ट्रिक ही खरीदेगा। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि सरकारी विभाग भी नीति के अनुसार ही गाड़ियों की खरीद करेंगे। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सभी गाड़ियां ही विभाग इलेक्ट्रिक खरीदें।
पांच साल में सीटीयू की सभी बसों को भी इलेक्ट्रिक करने के आदेश
ईवी नीति के अनुसार, सीटीयू को अपनी सभी बसें इलेक्ट्रिक करनी होंगी। वर्तमान में 80 ई-बसें चल रही हैं जबकि ट्राइसिटी रूट पर 350 से ज्यादा डीजल बसें हैं। शहर में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने सीएनजी ऑटो को परमिट देना बंद कर दिया है। अब सिर्फ ई-ऑटो को शहर में सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6500 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है, लेकिन सरकारी दफ्तरों में अभी भी वाहनों को ईवी में बदलना शुरू नही हुआ है।