चंडीगढ़। कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप को समय रहते पहचान कर उससे बचाव के उपाय करने के लिए पीजीआई में जल्द से जल्द जीनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित करने का निर्देश दिए गए हैं। लेकिन प्रशासक के आदेश पर रिमाइंडर के बावजूद कोई काम शुरू नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं इस विषय पर पीजीआई डायरेक्टर से लेकर अन्य संबंधित अधिकारियों के पास अब तक लैब स्थापित करने को लेकर काम शुरू न होने से संबंधित कोई पुख्ता कारण नहीं है। स्थिति यह है कि विलंब की समस्या से बचाव जिस लैब को स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, वह खुद ही विलंब का शिकार हो गया है।
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अभी ट्रेनिंग भी बाकी
पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने शहर के मरीजों में डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरीएंट मिलने के बाद 29 जून की वाररूम मीटिंग में जल्द ही पीजीआई में जीनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित करने की बात कही थी। इसमें विलंब होने पर प्रशासक ने 13 जुलाई को हुए वाररूम मीटिंग में जल्द से जल्द लैब स्थापित करने का निर्देश दिया। सूत्रों का कहना है कि अब तक पीजीआई में डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी नहीं हो पाई है।
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कब होगी उपकरणों की खरीद
पीजीआई के उच्चाधिकारियों का कहना है कि लैब के लिए कुछ उपकरणों की खरीद की जानी है और कुछ अन्य विभागों में उपलब्ध हैं। अन्य विभागों में उपलब्ध उपकरणों की भी अभी जांच नहीं की गई है कि वे लैब के लिए उपयोगी हैं कि नहीं। जानकारी के अनुसार जून माह में शहर से 29 लोगों का नमूना नई दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एनसीडीसी भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। वहां से रिपोर्ट आने में डेढ़ से दो माह का समय लगता है। बता दें कि शहर में अब तक अल्फा वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट और डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हो चुकी है।
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जीनोम सिक्वेंसिंग लैब की स्थापना को लेकर वॉयरोलॉजी विभाग को दिशा निर्देश दे दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही सुविधा शुरू हो जाएगी।
-प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई