फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हजारों को कैरियर की नई राह दिखा रहे हैं ये जनाब

Fri, 30 May 2014 03:01 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण /अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
बचपन में स्कूली पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हिंदी माध्यम से हासिल की। लेकिन, अच्छी नौकरी की चाहत उन्हें चंडीगढ़ शहर में ले आई। शुरुआत में अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ नहीं होने के कारण यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए काफी दिक्कतें आईं। लेकिन, बुलंद हौसलों ने आज उन्हें ट्राइसिटी के सैकड़ों युवाओं के लिए रोल मॉडल बना दिया है।
विज्ञापन


सिर्फ एक सरकारी नौकरी तक की चाह रखने वाला शख्स आज हजारों को कैरियर की नई राह दिखा रहा है। चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित एएए ब्राइड एकेडमी के डायरेक्टर आरके महाजन ऐसे ही खास प्रतिभाशाली लोगों में शुमार हैं।

महाजन ने पिछले 12 सालों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के तहत 5 हजार से अधिक युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा किया है।  महाजन कहते हैं कि मंजिल को पाना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन लगन से किए गए छोटे-छोटे प्रयास सफलता जरूर दिलाते हैं।
विज्ञापन


70 किलोमीटर का सफर तय कर जाते थे पढ़ने  
आरके महाजन का जन्म हिमाचल के कांगड़ा स्थित हरीपुर गुलेर गांव में हुआ। महाजन के स्व. पिता सुरेशचंद्र सरकारी कर्मचारी और स्व. मां ऊषा जेबीटी टीचर थीं। शुरू से ही पढ़ाई में तेज रमन गांव के स्कूल से 12वीं नॉन मेडिकल में पास होने वाले एकमात्र छात्र थे।

ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए हर रोज 70 किलोमीटर का सफर कर धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट कालेज में जाते थे। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ की चमक उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी में खींच लाई। स्टेटेस्टिक विभाग से एमएससी करने वाले महाजन ने बताया कि स्कूली स्तर पर हिंदी मीडियम से पढ़ाई के कारण उन्हें शुरुआत में काफी दिक्कतें आईं। पढ़ते हुए डिक्शनरी साथ रखनी पड़ती थी।

एमएससी करने के बाद दोस्तों की सलाह पर बैंक पीओ की तैयारी शुरू की। करीब एक साल की कड़ी मेहनत के बाद महाजन का 4-5 बैंक में सिलेक्शन हो गया। लेकिन, अब उन्होंने सरकारी नौकरी की जगह खुद का इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला लिया।

5 स्टूडेंट से बीएड की कोचिंग देने वाले महाजन के ट्राइसिटी और साथ लगते राज्यों में 12 कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं। जहां पर टीचिंग, एसएससी और यूजीसी नेट की बेहतरीन कोचिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि उनके पास 100 से अधिक लोगों के फ्रेंचाइजी लेने के ऑफर आए हैं। लेकिन, वह क्वालिटी एजुकेशन के मामले में कोई समझौता करने को तैयार नहीं।
 
गरीबों को दे रहे निशुल्क कोचिंग
महाजन बताते हैं कि उन्होंने खुद पढ़ाई के दिनों में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैरियर की सही जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें काफी धक्के खाने पड़े। लेकिन, उससे वह कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत हुआ। महाजन हर साल आर्थिक तौर पर गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाते हैं।

लड़कियों के लिए खास स्कॉलरशिप दी जाती है। साल में 4 -5 लाख रुपये स्कॉलरशिप पर खर्च करते हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अव्वल आने वालों को भी सम्मानित किया जाता है। महाजन का कहना है कि आज के युवाओं को सफल होने के लिए सही समय पर सही मार्गदर्शन की जरूरत है, लेकिन उन्हें यह नहीं मिल पाता। 
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें