चंडीगढ़ में डेंगू ने अब एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट की मौत हो गई। साथ ही मरीजों की संख्या भी 200 हो गई। दोआबा कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले 21 वर्षीय गगनजोत ने पंचकूला के अल्केमिस्ट हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया।
सेक्टर 41 बड़हेड़ी में रहने वाले परिजनों ने बताया कि कालेज की ओर से बुधवार को शिमला से आगे फागु में एक ट्रिप गया था। जिसमें गगनजोत भी शामिल था। वहां पर वह बुखार से पीड़ित हो गया। वह बिना बताए खुद दवा लेने लगा। जब वह लौटा तो परिवार ने पहले से ही मसूरी जाने का प्लान बना रखा था। वह मसूरी भी चला गया। शनिवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई। पहले मसूरी में डाक्टरों को दिखाया गया, लेकिन डॉक्टर की दवा से राहत नहीं मिली। परिजन उसे लेकर चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए।
रास्ते में तबियत और बिगड़ने से उसे पंचकूला सेक्टर छह के हास्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। लेकिन परिजन पीजीआई आने के बजाए पंचकूला एल्केमिस्ट हॉस्पिटल पहुंच गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि डाक्टरों ने उन्हें बताया कि बेटे की मौत डेंगू से हुई है। उसके प्लेटलेट्स काफी कम थे।
मलेरिया विंग ने करवाई फॉगिंग
सूचना मिलने पर चंडीगढ़ प्रशासन की मलेरिया विंग की टीम भी एक्टिव हो गई। टीम ने मौके पर पहुंच फॉगिंग की। हालांकि अधिकारियों ने अब तक गगनजोत की मौत डेंगू से हुई इसकी पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों ने पंचकूला अल्केमिस्ट हॉस्पिटल व सिविल हास्पिटल से रिपोर्ट मंगवाई है। उनका कहना है कि रिपोर्ट देखने के बाद ही कंफर्म कर पाएंगे कि मौत डेंगू से हुई थी।
डेंगू ने लगाई डबल सेंचुरी
डेंगू के केस ने डबल सेंचुरी लगा दी है। डेंगू के कंफर्म केसों की संख्या 209 पहुंच गई है। रविवार को कुल केस 198 थे। ट्राइसिटी में अब तक कुल छह मौत हो चुकी है। मरने वालों में चंडीगढ़ के तीन लोग शामिल हैं। मलेरिया विंग का कहना है कि आने वाले दिनों में केस बढ़ने की संभावना काफी अधिक है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। दस अक्तूबर के आसपास पीक टाइम आ सकता है। मौसम के तापमान डेंगू के लिए अनुकूल बनता जा रहा है।
डिस्पेंसरी के डाक्टरों की ट्रेनिंग
डेंगू का आउट ब्रेक होने पर चंडीगढ़ प्रशासन ने डिस्पेंसरी में कार्यरत डाक्टरों की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। ट्रेनिंग के लिए पीजीआई स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ व इमरजेंसी के डाक्टरों को बुलाया गया। डा. अनिल गर्ग ने बताया कि डाक्टरों को ट्रेनिंग जरूरी है, ताकि डिस्पेंसरी स्तर पर मरीजों की स्क्रीनिंग हो सके। साथ ही डिस्पेंसरी स्तर पर ही मरीजों को पत चल जाए कि उन्हें डेंगू है या फिर कोई दूसरी बीमारी। डेंगू आउट ब्रेक होने पर साधारण बुखार को भी लोग डेंगू मान लेते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर यह ट्रेनिंग शुरू हुई है।
मरीज को शिमला में बुखार आया था। उसकी मौत भी चंडीगढ़ से बाहर हुई है। हमने रिपोर्ट मंगवाई है। रिपोर्ट के बाद कंफर्म डेंगू के बारे में कुछ बोल पाऊंगा।
- डॉ. अनिल गर्ग, असिस्टेंट डायरेक्टर मलेरिया विंग