फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: डेढ़ साल में इंजीनियरिंग विभाग ने नहीं दिया आरटीआई का जवाब, सूचना आयुक्त ने जारी किया शोकॉज नोटिस

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी आरटीआई एक्ट की भी परवाह नहीं करते। डेढ़ साल पहले मांगी गई एक जानकारी का जवाब विभाग के अधिकारियों ने अभी तक नहीं दिया है, जिसकी वजह से नई दिल्ली स्थित सूचना आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया है और यूटी इंजीनियरिंग विभाग के सीपी डिवीजन नंबर-6 के एसडीई को शोकॉज नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन

सितंबर 2022 में यूटी प्रशासन ने पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए सेक्टर-17 में नीलम सिनेमा के पीछे सड़क पर 180 मीटर लंबा टेबलटॉप पाथवे का निर्माण शुरू किया। अराइवसेफ संस्था के प्रेसिडेंट हरमन सिंह सिद्धू को इसमें कई कमियां नजर आईं और उन्होंने तीन फरवरी 2023 को एक आरटीआई फाइल कर दो जानकारियां मांगी। सिद्धू ने उस 180 मीटर टेबलटॉप के आर्किटेक्चरल प्लान की कॉपी और टेबलटॉप के टेंडर या रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के लिए टेक्निकल स्पेसिफिकेशन की कॉपी मांगी। विभाग के सीपी डिवीजन नंबर-6 ने जवाब नहीं दिया, जिसके बाद पहली अपील 18 अप्रैल 2023 को सुनी गई, जहां विभाग के अधिकारी ने कहा कि जो जानकारी मांगी गई है वो कंसल्टेंट के पास है। प्रथम अपीलीय प्राधिकरण ने आदेश दिया कि जो जानकारी मांगी गई है वो तुरंत मुहैया कराई जाए, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं दिया। इसके बाद 15 जून को दूसरी अपील दायर की गई। इस पर बुधवार को केंद्रीय सूचना आयुक्त ने आदेश जारी करते हुए इंजीनियरिंग विभाग के सीपी डिवीजन नंबर-6 के एसडीई और जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि सूचना न देने और नोटिस के बावजूद आयोग के समक्ष उपस्थित न होने के कारण संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्यों न आरटीआई अधिनियम की धारा 20 (1) के अंतर्गत अधिकतम जुर्माना लगा दिया जाए। साथ ही चार सप्ताह के अंदर बिंदुवार सूचना उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया है।

सिद्धू बोले-180 मीटर का बना दिया टेबलटॉप लेकिन विभाग के पास तकनीकी विवरण नहीं
हरमन सिंह सिद्धू ने कहा कि यह अकल्पनीय है कि चंडीगढ़ का हार्ट कहे जाने वाले सेक्टर-17 में इंजीनियरिंग विभाग ने 180 मीटर का टेबल टॉप बना दिया, लेकिन जब उनसे उस काम का तकनीकी विवरण मांगा गया तो विभाग नहीं मुहैया करा पा रहा है। इससे विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परियोजना का क्रियान्वयन घटिया तरीके से किया गया। यह दिव्यांगों के लिए दुर्गम है और गुजरने वाले साइकिल चालकों और दोपहिया वाहन सवारों के हड्डियों तक को हिला देता है। यह भारत में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी के मानकों का उल्लंघन है और विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के पैरा 41 की पूरी तरह से अनदेखी करता है। बता दें कि विभाग ने इस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्चे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें