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'जिंदगी को गले लगाओ, सुसाइड को नहीं'

Mon, 10 Mar 2014 09:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/दीपक शाही
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अकेलापन, मानसिक तनाव, आफिस-परिवार में कार्यों में तालमेल बैठाने में दिक्कत, परिवार वालों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना...।
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ये तमाम ऐसे कारण हैं, जो आत्महत्या के लिए प्रेरित करते हैं। महिला हों या पुरुष, अनपढ़ हों या पढ़े-लिखे लोग...। हर वर्ग के लोग छोटी-मोटी परेशानियां आने पर ही इस तरह के कदम उठाने लगे हैं।

आत्महत्या का प्रयास करने का सबसे ज्यादा मामला महिलाओं का आता है, लेकिन उनमें ज्यादातर की जान बच जाती है। वहीं, पुरुषों में बहुत कम केस ऐसे होते हैं, जिनमें जान बचती है।
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सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में हर सप्ताह दो से तीन केस डिप्रेशन की वजह से सुसाइड के प्रयास के आ रहे हैं और 10 में से एक महिला डिप्रेशन की वजह से सुसाइड का प्रयास करती है।

आत्महत्या के प्रयास के संकेत

मरने की या खुद को मारने की इच्छा के बारे में बात करना
खुद को मारने का तरीका ढूंढना
हमेशा निराशा महसूस करना
दूसरों पर बोझ होने के बारे में बात करना
तनाव में आकर शराब या नशीली दवा का अधिक सेवन करना
बिना सोच-विचार के बर्ताव करना
हमेशा अकेला रहने की चाहत या अकेलापन महसूस करना
अक्सर बदला लेने के बारे में बात करना

इनमें हाई रिस्क
तलाकशुदा, विधवा, यंग, क्रानिक मेडिकल साइकेट्रिक इलनेस से पीड़ित (एड्स, किडनी), स्किजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिस्आर्डर, नशा करने वालों में हाई रिस्क होता है।
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ये भी हैं कारण
तनावपूर्ण माहौल में वर्किंग।
रिलेशनशिप प्राब्लम।
परिवार में किसी ने सुसाइड किया हो तो अन्य सदस्यों में भी रिस्क बढ़ जाता है।

इसलिए महिलाएं करती हैं प्रयास
महिलाओं में इनवायरमेंटल स्ट्रेस ज्यादा होता है। इसलिए महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सुसाइड का प्रयास करती हैं, लेकिन पुरुष जब डिप्रेशन की वजह से सुसाइड करता है तो बचने की उम्मीद कम होती है। वहीं, महिलाएं डिप्रेशन में आकर सुसाइड का प्रयास ज्यादा करती हैं, लेकिन ज्यादातर की जान बच जाती है।

बचाव के उपाय
सबसे पहले समस्याओं का सूची बनाएं, जिनसे आप जूझ रहे हैं।
एक समाधानों की सूची बनाएं, जिनसे आप उन समस्याओं को दूर कर सकें।
अपने भरोसे के किसी व्यक्ति को मदद के लिए कह सकते हैं।
एक से दो छोटी-मोटी समस्याओं से निपटने से आत्महत्या की तत्कालीन भावना को खत्म किया जा सकता है।
जीने की वजह के बारे में सोचें। अतीत में आपके लिए मददगार साबित हुई चीजों या बातों को याद करें।
आपको जैसा महसूस होता है, उसका उल्टा करें। दिनचर्या में सुधार लाएं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए मनोरोग चिकित्सक से सलाह लें।
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