हरियाणा बिजली निगम के स्टोर के कंट्रोलर पद पर 12 जनवरी 2017 को नियुक्त किए गए केडी बंसल ने जीनस व एलऐंडटी कंपनी के मीटरों के सैंपल भेजकर उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठा दिए थे। बाद में मीटर एंटी टेंपर टेस्ट में फेल हो गए और इस तरह 112 करोड़ रुपये के मीटर घोटाले की परतें खुलने लगीं।
केडी बंसल की इसी कार्रवाई से नाराज होकर इस घोटाले में विजिलेंस द्वारा दोषी करार दिए गए चीफ इंजीनियर आरके जैन ने सीएमडी शत्रुजीत कपूर से शिकायत कर दी थी। इसके बाद मात्र 28 दिन बाद ही केडी बंसल को स्टोर कंट्रोलर के पद से हटाकर निगम की ही कंज्यूमर ग्रीवेंस रेडरेशल फॉर्म का चेयरमैन लगा दिया गया था।
इस तरह होता है मीटरों के सैंपलिंग में हेरफेर
बिजली निगम के अधिकारियों की मानें तो मैटीरियल मैनेजमेंट (एमएम) विंग की ओर से जिस भी कंपनी से मीटर खरीदने के लिए ठेका दिया जाता है, उसकी ओर से हिसार मुख्यालय स्थित स्टोर में मीटर भेजे जाते हैं। इन मीटरों में डिफेक्टिव व सही दोनों तरह के मीटर होते हैं।
अगर अधिकारी कंपनी को फायदा पहुंचाना चाहे तो खराब के बजाय सही मीटरों को अलग छांटकर सैंपलिंग व इंस्पेक्शन के लिए भेज देते हैं। इसके बाद रिपोर्ट सही आ जाती है और कंपनी के सैंपल पास हो जाते हैं। मगर केडी बंसल ने छांटने के बजाय रेंडमली सैंपलिंग करवा दी।