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बुरी खबर, बढ़ने वाली हैं बिजली की दरें

Sun, 04 Jan 2015 12:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में बिजली की नई दरें आगामी एक अप्रैल से लागू होंगी। प्रदेश में बिजली सप्लाई का जिम्मा संभाल रहीं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) को एनुअल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) संबंधी रिपोर्ट सौंपते हुए बिजली की दरें 18 से 20 प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की है।
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एचईआरसी ने इस सिफारिश पर विचार शुरू कर दिया है। हालांकि आयोग ने इस रिपोर्ट पर गत 29 दिसंबर तक प्रदेश वासियों से प्रतिक्रिया व सुझाव भी मांगे थे लेकिन आयोग को बहुत कम प्रतिक्रियाएं मिलीं। अब नियामक आयोग ने वितरण कंपनियों द्वारा दी गई रिपोर्ट पर सावर्जनिक सुनवाई की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें प्रदेश वासी अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करवा सकेंगे।

आयोग की ओर से जनवरी के अंत में या फिर फरवरी माह के शुरू में सार्वजनिक सुनवाई की योजना बनाई जा रही है। लोगों की आपत्तियां और सुझाव जानने के बाद ही आयोग बिजली की नई दरों पर मार्च माह में निर्णय लेगा। नई दरें एक अप्रैल से लागू हो जाएंगी।
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5940 करोड़ रुपये बिजली बिलों के रूप में फंसे हैं

बिजली वितरण निगमों की ओर से नियामक आयोग को हाल ही में जो रिपोर्ट सौंपी गई है, उसमें कहा गया है कि कंपनियों की 5940 करोड़ रुपये की राशि बकाया बिजली बिलों के रूप में फंसी है।

कंपनियों ने कहा है कि उन्हें भविष्य में बिजली सप्लाई को सही तरीके से चलाने के लिए 18 से 20 प्रतिशत दरों में इजाफा करने की जरूरत है। कंपनियों की ओर से यह भी कहा गया है कि वह इस समय 8000 करोड़ रुपये के घाटे में हैं और उनपर 26 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ भी है।

सिफारिशों पर लोगों ने उठाएं हैं सवाल
बिजली नियामक आयोग की वेबसाइट पर कुछ ही लोगों ने ही वितरण कंपनियों की सिफारिशों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इनमें रिटायर्ड आईएएस आरएस चौधरी और पूर्व मंत्री संपत सिंह भी शामिल हैं।

इन्होंने सवाल उठाया है कि वितरण कंपनियां अपना घाटा क्यों नहीं पूरा करतीं? कंपनियों की ओर से इस तरह के प्रबंध क्यों नहीं किए जाते, जिससे बकाया बिलों का भुगतान समय पर कराया जा सके और लोगों पर बिजली के रेट बढ़ाने का बोझ नहीं डालना पड़े?
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