इलेक्ट्रिक बसें चंडीगढ़ के लोगों के सपना बनकर रह गई हैं। चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने पुणे से लेकर चीन तक की यात्रा कर ली है। चार बार टेंडर जारी किया गया, लेकिन अब तक शहर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें नहीं दौड़ पाई हैं। कोविड की वजह से चंडीगढ़ को घाटा हुआ तो केंद्र ने 80 बसें देने का ऐलान कर दिया, लेकिन प्रशासन अब तक उसमें से भी एक बस नहीं चला पाया है।
बसों को सड़क पर उतारने के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन परिवहन विभाग कंपनी नहीं तय कर पाया। कोविड से पहले दो बार खुद के खर्चे पर बसें चलाने के लिए टेंडर जारी किया गया, उसमें सफल नहीं हो पाए। फिर केंद्र सरकार ने बसें देने का एलान किया तो वह बसें चलाने के लिए दो बार टेंडर जारी किया। पहली बार में कंपनियां नहीं आईं। दूसरी बार किए गए टेंडर में फिर तीन कंपनियों ने आवेदन किया है। विभाग इसमें से भी अब तक एक कंपनी तय नहीं कर पाया है।
जानकारी के अनुसार 11 फरवरी को परिवहन विभाग की जनरल बॉडी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें एक कंपनी पर मुहर लग सकती है। हालांकि शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की कवायद वर्ष 2016 से ही चल रही हैं। 2017 में सीटीयू ने दो अलग-अलग कंपनी की इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल भी लिया था। ट्रायल में इन दोनों की बसों का रिजल्ट काफी बेहतर रहा था। माइलेज भी इन बसों की पहले से चल रही डीजल बसों से कहीं ज्यादा है। उस वक्त प्रशासन के अधिकारियों ने ट्रायल के बाद संतुष्टि जताई थी। ट्रायल के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले कुछ महीनों में बसें सड़क पर आ सकती हैं, लेकिन अब ट्रायल को भी तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है।