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चंडीगढ़ का हाल : चार साल, कई टेंडर, पुणे से लेकर चीन तक की यात्रा, अब तक नहीं चलीं ई-बसें

Tue, 09 Feb 2021 02:28 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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इलेक्ट्रिक बस। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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इलेक्ट्रिक बसें चंडीगढ़ के लोगों के सपना बनकर रह गई हैं। चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने पुणे से लेकर चीन तक की यात्रा कर ली है। चार बार टेंडर जारी किया गया, लेकिन अब तक शहर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें नहीं दौड़ पाई हैं। कोविड की वजह से चंडीगढ़ को घाटा हुआ तो केंद्र ने 80 बसें देने का ऐलान कर दिया, लेकिन प्रशासन अब तक उसमें से भी एक बस नहीं चला पाया है। 
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बसों को सड़क पर उतारने के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन परिवहन विभाग कंपनी नहीं तय कर पाया। कोविड से पहले दो बार खुद के खर्चे पर बसें चलाने के लिए टेंडर जारी किया गया, उसमें सफल नहीं हो पाए। फिर केंद्र सरकार ने बसें देने का एलान किया तो वह बसें चलाने के लिए दो बार टेंडर जारी किया। पहली बार में कंपनियां नहीं आईं। दूसरी बार किए गए टेंडर में फिर तीन कंपनियों ने आवेदन किया है। विभाग इसमें से भी अब तक एक कंपनी तय नहीं कर पाया है। 


जानकारी के अनुसार 11 फरवरी को परिवहन विभाग की जनरल बॉडी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें एक कंपनी पर मुहर लग सकती है। हालांकि शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की कवायद वर्ष 2016 से ही चल रही हैं। 2017 में सीटीयू ने दो अलग-अलग कंपनी की इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल भी लिया था। ट्रायल में इन दोनों की बसों का रिजल्ट काफी बेहतर रहा था। माइलेज भी इन बसों की पहले से चल रही डीजल बसों से कहीं ज्यादा है। उस वक्त प्रशासन के अधिकारियों ने ट्रायल के बाद संतुष्टि जताई थी। ट्रायल के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले कुछ महीनों में बसें सड़क पर आ सकती हैं, लेकिन अब ट्रायल को भी तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है।
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खुद नहीं खरीद पाएं तो केंद्र सरकार ने दी 80 बसें, वो भी अब तक नहीं चलीं
पहले परिवहन विभाग खुद 40 ई-बसें चलाने की तैयारी में था। कोरोना की वजह लगे घाटे के कारण परिवहन विभाग ने खुद इलेक्ट्रिक बसें खरीदने से इनकार कर दिया तो केंद्र आगे आया। 25 सितंबर को 80 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात चंडीगढ़ को मिल गई। लेकिन विभाग इनमें से भी एक भी बस को सड़क पर नहीं उतार सका है। केंद्र सरकार की घोषणा के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सांसद किरण खेर ने भी ट्वीट कर धन्यवाद किया था।

ई-बसों के लिए कोविड से पहले चीन की यात्रा पर थे अधिकारी
इलेक्ट्रिक बसों को लेकर परिवहन विभाग के निदेशक उमाशंकर गुप्ता ने पुणे से लेकर चीन तक दौरा कर लिया है। 2020 के शुरुआत में गुप्ता चीन गए थे और वहां इलेक्ट्रिक बसों को लेकर अपने सभी संदेह दूर किए थे। चीन के शंघाई और शेनझेन में करीब सवा दो करोड़ की आबादी है। शेनझेन में पिछले पांच साल से करीब 17 हजार इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। अधिकारियों ने बसों में सफर भी किया। 

इसके अलावा चार्जिंग से लेकर रखरखाव की प्रक्रिया को भी चेक किया था। साथ ही बसें बनाने वाली कंपनी और इन्हें संचालित करने वाले ट्रांसपोर्ट विभाग और अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। हालांकि इस यात्रा को भी एक साल पूरा हो गया है। विभाग के अधिकारियों ने जब पुणे का दौरा किया तो पाया कि वहां बसों का संचालन 56 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से हो रहा है, लेकिन चंडीगढ़ में कंपनी 74 रुपये मांग रही थी।
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