19 अगस्त को खत्म हो रहे सदस्यता अभियान के बाद भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव होने जा रहे हैं। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष के पद चुनाव होंगे। भाजपा के प्रदेश चुनाव अधिकारी प्रेम कौशिक ने बताया कि सबसे पहले बूथ लेवल के चुनाव होंगे। इसके बाद मंडल और जिलाध्यक्षों का चुनाव होगा। नवंबर के महीने में नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव होगा। शहर में अभी भाजपा का सदस्यता अभियान चल रहा है।
20 अगस्त तक भाजपा ने चंडीगढ़ से एक लाख लोगों को सदस्य बनाने का टारगेट रखा है। 20 अगस्त के बाद भाजपा का संगठनात्मक चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले बूथ अध्यक्ष के चुनाव होंगे, जिसके बाद बूथ अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष का चयन करेगा। प्रत्येक मंडल में 18 से 25 बूथ अध्यक्ष चुने जाएंगे। यही मंडल अध्यक्षों को चुनेंगे, जो कि जिला अध्यक्ष का चयन करेंगे। एक जिला में 6 से 8 मंडल होते हैं।
चंडीगढ़ में भाजपा के 5 जिला अध्यक्ष चुने जाएंगे। इन सभी के चयन के बाद प्रदेश अध्यक्ष के पद पर चुनाव होंगे, जिसमें विभिन्न लेवल के कार्यकर्ताओं के डेलीगेशन मिलकर प्रदेश अध्यक्ष को चुनेंगे। माना जा रहा है कि नवंबर के महीने में भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। ऐसे में संजय टंडन तब तक अपने पद पर बने रहेंगे।
टंडन को पद पर रहते जनवरी में हो जाएंगे 10 साल, देश में पहले नेता
संजय टंडन अगर जनवरी तक अध्यक्ष पद पर बरकरार रहते हैं, तो वह बतौर प्रदेश अध्यक्ष 10 साल पूरे कर लेंगे। इतने लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर रहने वाले वह पहले नेता है। संजय टंडन 18 जनवरी 2010 को प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे, जिसके बाद से अभी तक वह इस पद पर काबिज हैं।
टंडन का दूसरा कार्यकाल भी जनवरी 2016 में खत्म हो गया था, बावजूद इसके पार्टी ने टंडन पर विश्वास जताया और पद पर बनाए रखा। टंडन के नेतृत्व में 2011 नगर निगम चुनाव। साल 2012 में पंचायत समिति, 2013 में सरपंच चुनाव, 2014 लोकसभा चुनाव, साल 2015 में मार्केट कमेटी चुनाव, 2016 नगर निगम चुनाव, साल 2017 में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव की कमान संभाली।
नए अध्यक्ष को लेकर दिल्ली में लॉबिंग शुरू
भाजपा के नए अध्यक्ष पद को लेकर दिल्ली में अभी से लॉबिंग शुरू हो गई है। भाजपा केतीनों कद्दावर नेता अपने करीबियों को पद पर बिठाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और किरण खेर दो दावेदार थे, लेकिन खेर टिकट लेने में कामयाब रहीं। ऐसे में नए अध्यक्ष पर सांसद किरण खेर की राय काफी अहम रहेगी।