बेटा रोजी-रोटी कमाने बिहार से चंडीगढ़ आया। फोन पर पिता की मौत की खबर मिली, घर जाना है। बिना पैसे कैसे जाए, घंटों से ATM की लाइन में है। ये दास्तां है सेक्टर 17 स्थित एसबीआई बैंक के एटीएम की लाइन में लगे बिहार के गया के रहनेवाले शशिकांत की। सुबह से शशिकांत बैचेन से खड़े एटीएम के चलने का इंतजार कर रहे थे। एटीएम दोपहर एक बजे तक पैसे नहीं डले थे।
लेकिन एटीएम के बाहर कतार में खड़े सैकड़ों लोगों को उम्मीद थी कि पैसा उसी एटीएम में आएगा। बैंक स्कावयर में दर्जनभर एटीएम थे लेकिन दोपहर तक पैसा किसी भी एटीएम में नहीं आया था। उन एटीएम के बाहर कोई लाइन भी नहीं थी। क्योंकि उनमें पैसा आने की किसी को कोई उम्मीद भी नहीं थी।
इतने पैसे भी जेब में नहीं थे कि घर जा सके
एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनें
शशिकांत ने बताया कि वो यहां पीयू में रहते है। इंवायरमेंट स्टडी विभाग में तैनात है। शशिकांत ने बताया कि बुधवार को घर से खबर आई है कि उनके 65 वर्षीय पिता कि मृत्यु हो गई है।
उसके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो घर जा सके। शशिकांत ने बताया कि मोबाइल एप पर पैसों वाला एटीएम तलाशा तो पाया कि शहर के किसी भी एटीएम पर कैश नहीं है। यहां लाइन लगी देखी तो लाइन में लग गया लेकिन पता चला अभी कैश यहां आ रहा है।
लेकिन एक घंटे से तो कैश डला नहीं। शशिकांत की पिता की मौत की खबर जब लाइन में लगे अन्य लोगों को पता चली तो उन्होंने शशिकांत को लाइन में सबसे आगे बुला लिया और जैसे ही कैश डला शशिकांत ने पैसे निकाले और स्टेशन की तरफ भागा।
सवेरे कैश डलता, शाम तक मुश्किल से चलता
एटीएम के सामने लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
वहीं एटीएम की लाइन में इंतजार कर रहे धनास के भगत सिंह ने बताया कि धनास से लेकर सेक्टर 17 तक सब एटीएम खाली पड़े है। यहां भी एक एटीएम पर पैसे है जिस पर इतनी लंबी लाइन है कि दो घंटे तक नंबर नहीं आएगा।
सेक्टर 22 के रहने वाले अजय कुमार अपने बच्चे को लेकर लाइन में घंटों तक लगे रहे। अजय ने बताया कि वो बच्चे के साथ लाइन में लगे है। जबकि उनकी पत्नी बैंक स्कावयर में अन्य एटीएम चैक करने गई है कहीं कोई एटीएम चलता मिल जाए।
शनिवार को तो पूरे शहर दस फीसदी एटीएम के सहारे ही चला। उन दस फीसदी एटीएम में कैश दोपहर बाद ही डाला गया। जो कि मुश्किल से शाम तक चले।