केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने 2011 के ट्रिब्यूनल के फैसले का पालन न करने पर यूटी के एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन की सरकारी प्रापर्टी अटैच करने के
आदेश दिए हैं।
साथ ही अटैचमेंट वारंट जारी करने के लिए याचिकाकर्ता पक्ष से एक सप्ताह में प्रापर्टी की लिस्ट सौंपने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आदेश पारित हुए पांच साल से ज्यादा समय और एग्जीक्यूशन
पटीशन के तीन साल हो चुके हैं। इसके बावजूद विभाग ने अब तक उन्हें भुगतान नहीं किया। ट्रिब्यूनल की डबल बैंच ने अपने आदेश में कहा कि मामले में पिछली तारीख पर प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपये ‘कॉस्ट’ लगाई गई थी, उसे भी जमा नहीं करवाया गया है। इसके अलावा प्रतिवादी पक्ष से यूटी के एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन को पेश होने को कहा था। दोनों ने ही आदेश का पालना नहीं किया है। ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादी पक्ष को 10 हजार रुपये कॉस्ट जमा करवाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
इसके अलावा एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन को केस की अगली सुनवाई 24 अक्तूबर को बेंच के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। हालांकि यह भी कहा गया है कि यदि प्रतिवादी पक्ष ट्रिब्यूनल के फैसले का पालना कर देते हैं तो उन्हें पेश होने की जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान मामले में दोनों अफसरों की ओर से पेश काउंसिल ने पेशी से छूट की मांग की थी।
बता दें कि पिछली सुनवाई पर ट्रिब्यूनल ने यूटी एजुकेशन विभाग को ‘सुओ मोटो कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था। मामला शहर के विभिन्न गवर्नमेंट कॉलेजों में तैनात कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर की 132
एग्जीक्यूशन याचिकाओं की सुनवाई से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए प्रशासन को आदेश दिए थे कि कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर को उचित पे स्केल और महंगाई भत्ता दें।
यह आदेश कैट ने मार्च 2011 में दिया था। संबंधित फैसले का पालन न करने का आरोप लगाते हुए सभी लेक्चरर्स ने ट्रिब्यूनल में अप्रैल 2013 में एग्जीक्यूशन पटीशन दायर की थी। वहीं ट्रिब्यूनल ने
यूटी काउंसिल की दलील को सही न पाते हुए विभाग को 10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। याचिका में कहा गया था कि प्रशासन संशोधित डीए नहीं दे रहा है। यूटी काउंसिल ने केस की सुनवाई के
दौरान कहा कि हाईकोर्ट ने 2008 में कहा था कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों को संशोधित डीए देय नहीं है।