केंद्र सरकार ने परिजनों की सहमति से 21 सितंबर से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को स्कूल में बुलाने की इजाजत दे दी है। लेकिन यूटी शिक्षा विभाग गूगल फार्म के जरिए अभिभावकों से पूछेगा कि वह बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं या नहीं? सभी स्कूल इस फॉर्म को स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इसके अलावा इस फार्म को व्हॉट्सएप पर भी विद्यार्थियों को भेजा जाएगा।
यूटी शिक्षा विभाग कोरोना के चलते
यूटी शिक्षा विभाग ने भी इस संबंधी तैयारी शुरु कर दी है। विभाग शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से उनकी मर्जी पूछेगा। इसके बाद जिन बच्चों के परिजन बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी होंगे, उनके लिए स्कूल खोलने करने की तैयारी की जाएगी। यूटी शिक्षा विभाग ने भी इस संबंधी तैयारी शुरु कर दी है। विभाग शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से उनकी मर्जी पूछेगा।
इसके बाद जिन बच्चों के परिजन बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी होंगे, उनके लिए स्कूल खोलने करने की तैयारी की जाएगी। शिक्षा विभाग ने कहा है कि गूगल फॉर्म के माध्यम से स्कूल 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के माता-पिता से उनकी इच्छा पूछेगा। इसके अलावा वह विद्यार्थी व परिजन जिन्हें गूगल फॉर्म के बारे में जानकारी नहीं है, वह अपनी सहमति व्हॉट्सऐप और टेस्ट मैसेज के जरिये भी दे सकेंगे।
विभाग की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार सभी स्कूलों से जानकारी प्राप्त होने के बाद स्कूल जाने को राजी हुए बच्चों का डाटा तैयार किया जाएगा और फिर उसके हिसाब से स्कूल खोलने संबंधी तैयारियां की जाएंगी।
चुनौती बड़ी.. शिक्षा विभाग के कई दफ्तर जूझ रहे कोरोना से
शिक्षा विभाग भले स्कूलों को खोलने की तैयारी कर रहा है, लेकिन विभाग के कई दफ्तर खुद कोरोना के संक्रमण से जूझ रहे हैं। इस बीच स्कूलों को चलाना और बच्चों को कोरोना के संक्रमण से दूर रख पाना शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। गौरतलब है कि शिक्षा दिवस के दिन जिला शिक्षा अधिकारी की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है। इसके अलावा शिक्षा निदेशक और उप-निदेशन समेत कई कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।