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हरियाणा में अब पढ़े-लिखे लोग ही लड़ सकेंगे चुनाव

Wed, 12 Aug 2015 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में लंबित पंचायत चुनाव के लिए पुराने तौर तरीकों से तैयारी में जुटे प्रत्याशियों को जोर का झटका लगा है। हरियाणा में अब सरपंच, पंच का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का दसवीं पास होना अनिवार्य कर दिया गया है।
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सहकारी बैंकों के कर्ज और बिजली के बिल का भुगतान नहीं करने वाले लोग भी अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 16 अगस्त से शुरू हो रहे अपने विदेश दौरे से पहले मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 को संशोधित करने का फैसला लिया। स्वच्छता अभियान पर जोर देते हुए पंचायती प्रत्याशियों के लिए यह भी शर्त लगा दी गई है कि उनके घरों में शौचालय बना होना चाहिए।

हरियाणा की भाजपा सरकार के इस फैसले की इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने कड़ी आलोचना की है। वहीं, सरकार के इस फैसले को प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पैठ बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। अब तक प्रदेश की पंचायतों में इनेलो का वर्चस्व देखा जाता रहा है।
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खट्टर सरकार द्वारा पढ़े-लिखे प्रत्याशी की शर्त लगाए जाने के पीछे एक कारण यह भी है कि भाजपा शिक्षित युवा वर्ग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित मान रही है। इनेलो ने इसे भाजपा सरकार की साजिश करार दिया है। इनेलो का मत है कि खट्टर सरकार ने पंचायत चुनावों से बचने के लिए यह फैसला लिया है।

सरकार जानती है कि इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी और चुनाव का मामला कोर्ट में लटक जाएगा। उधर, मुख्यमंत्री खट्टर ने इस फैसले को प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में नेतृत्व और शासन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए जरूरी बताया है।

पंचायती राज अधिनियम-1994 में यह किए गए संशोधन: पहला संशोधन: पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक होगी, लेकिन महिलाओं और अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के लिए योग्यता आठवीं कक्षा पास होगी। सरकार का दावा है कि यह संशोधन पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को और अधिक जवाबदेह बनाएगा क्योंकि वे अब निरक्षरता का लाभ नहीं उठा सकेंगे।

दूसरा संशोधन: ऐसे व्यक्ति, जिनके विरुद्ध सक्षम अदालत द्वारा घोर आपराधिक मामले, जिनमें कम से कम 10 साल कैद की सजा हो सकती है, में चार्जशीट किए गए व्यक्ति कोर्ट द्वारा माफ किए जाने तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस समय अदालत द्वारा दोषी करार व्यक्ति पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते हैं, लेकिन कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां व्यक्ति जांच प्रक्रिया में कमी के कारण या अभियोग की धारा न होने जैसी तकनीकी योग्यता पूरी न होने के कारण या सार्वजनिक अभियोजक द्वारा अच्छी तरह पैरवी न किए जाने के कारण छूट जाते हैं।

तीसरा संशोधन: सहकारी बैंकों से लिए गए ऋणों की अदायगी नहीं करने के दोषी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

चौथा संशोधन: ग्रामीण घरेलू बिजली कनेक्शनों की बकाया राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ सकेंगे। हरियाणा के गांवों में घरेलू बिजली कनेक्शनों के बिजली बिलों की अदायगी न किया जाना एक गंभीर समस्या बना हुआ है। वितरण बिजली निगमों द्वारा ग्रामीण घरेलू बिजली कनेक्शनों से हजारों करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूल की जानी है।

पांचवां संशोधन: पंचायती राज संस्थान के किसी भी भाग के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार को एक स्वप्रमाणित वक्तव्य फाइल करना होगा कि उनके आवास पर चालू शौचालय है।
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