कारण पूछने पर बताया गया कि उनकी स्थिति अभी खतरे से बाहर है। इस दौरान उन्हें उनकी मां से मिलने भी नहीं दिया गया। अगली सुबह 22 अप्रैल को जब वह अपनी मां से मिले तो उन्होंने बताया कि उन्हें रात को अस्पताल में भोजन भी नहीं मिला और कोई डॉक्टर भी देखने नहीं आया। यह बातें सुनकर और वहां की बदतर स्थिति देखकर उन्होंने अपनी मां को वहां से डिस्चार्ज करवा लिया। डिस्चार्ज के दौरान उन्हें 47901 रुपये का बिल थमा दिया गया। इसमें केवल सीटी स्कैन का नाम लिखा हुआ था। अन्य खर्चों में दवा, इंजेक्शन और डॉक्टर विजिट की सूचना दी गई थी, लेकिन यह नहीं बताया गया था कि कौन सा इंजेक्शन और दवा उन्हें दी गई या किस डॉक्टर ने कितनी बार उनकी स्थिति को देखा।
विवेक ने बताया कि 22 अप्रैल को वहां से डिस्चार्ज करवाकर उन्होंने अपनी मां को शहर के दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां उनकी मां को तीन दिनों तक आईसीयू में और तीन दिनों तक जनरल वार्ड में रखा गया। 6 दिनों के दौरान हुए इलाज पर दूसरे निजी अस्पताल ने उन्हें 94000 रुपये का बिल दिया है। इसमें प्रत्येक चीज की सूचना विस्तृत ब्योरे के साथ दी गई है।
विवेक का कहना है कि उन्होंने ईडन हॉस्पिटल के प्रबंधक से भी इलाज पर खर्च 47901 रुपये का ब्योरा मांगा था, लेकिन उन्हें ये नहीं दिया गया। विवेक ने बताया कि जब वह अपनी मां को डिस्चार्ज करा कर दूसरे अस्पताल में ले जा रहे थे उसी दौरान उनके पिता के पास ईडन हॉस्पिटल से कॉल आई कि उनके मरीज की स्थिति काफी गंभीर है। इलाज जारी रखने के लिए और 50000 रुपये तत्काल जमा करवा दें। यह सुनकर विवेक के पिता ने बताया कि वह अपनी पत्नी को वहां से डिस्चार्ज करवा चुके हैं। इतना सुनने के बाद भी अस्पताल से कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि अगर आपको मेरी बातों पर भरोसा नहीं है तो मैं आपके मरीज से आपकी बात करवा सकता हूं। विवेक ने आरोप लगाया कि कि पैसे की उगाही के लिए अस्पताल प्रबंधन किसी भी हद तक जा सकता है, इसलिए उसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मरीज पंचकूला या देश के किसी भी कोने का हो अगर उसने चंडीगढ़ के किसी अस्पताल पर मनमानी वसूली का आरोप लगाते हुए शिकायत की है तो उस पर जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वैसे भी पूर्व में चिह्नित निजी अस्पतालों को 7 दिन की मोहलत दी गई है। अगर इस दौरान उन्होंने अपना स्पष्टीकरण स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपा तो स्वास्थ्य विभाग उन पर अपने विवेक के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
-डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़
बिल को लेकर मरीज के परिजनों व अस्पताल के बीच में कुछ मिस कम्युनिकेशन हुआ है। मरीज के परिजन अस्पताल में आकर इस संबंध में संबंधित अधिकारी से मुलाकात कर लें, उनकी सारी आशंकाएं दूर कर दी जाएंगी। -डॉ. संजय बंसल, निदेशक, ईडन हॉस्पिटल
निजी अस्पताल के लिए प्रशासन द्वारा तय शुल्क
सामान्य मरीज से प्रतिदिन का चार्ज - जो मरीज कम लक्षण के साथ हॉस्पिटल आते हैं। हल्के बीमार हैं और उन्हें अगर एक दिन के लिए दाखिल करना होता है तो उनसे एनएबीएच एक्रीडेटेड हॉस्पिटल प्रतिदिन 5500 और नॉन एनएबीएच 4500 रुपये चार्ज कर सकते हैं।
जिन्हें हॉस्पिटल में लंबे समय तक दाखिल रहना हो
सामान्य मरीज- एक सामान्य मरीज जिसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। मरीज को आइसोलेशन बेड, सपोर्टिव केयर और ऑक्सीजन की जरूरत है। उससे एनएबीएच एक्रीडेटेड हॉस्पिटल नौ हजार रुपये से ज्यादा नहीं लेगा। इसमें 1200 रुपये की पीपीई भी शामिल रहेगी। वहीं जो हॉस्पिटल एनएबीएच से एक्रीडेटेड नहीं है, उससे आठ हजार रुपये लिए जा सकते हैं। इसमें भी पीपीई शामिल रहेगी।
गंभीर मरीज- वह मरीज जो आईसीयू में हैं लेकिन वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है। उससे एनएबीएच एक्रीडेटेड हॉस्पिटल 14 हजार जिसमें 2000 पीपीई के शामिल रहेंगे। वहीं नॉन एनएबीएच एक्रीडेटेड अस्पताल 13 हजार रुपये ले सकते हैं। इसमें दो हजार रुपये पीपीई के भी शामिल होंगे।
अत्यंत गंभीर मरीज- ऐसे मरीज जो आईसीयू में हैं और वेंटिलेटर केयर की जरूरत भी है, उनसे एनएबीएच एक्रीडेटेड हॉस्पिटल 16500 रुपये चार्ज कर सकते हैं। इसमें दो हजार रुपये पीपीई के लिए शामिल रहेंगे। जबकि नॉन एनएबीएच एक्रीडेटेड हॉस्पिटल 15 हजार रुपये चार्ज करेंगे। इसमें भी दो हजार पीपीई के लिए शामिल रहेंगे।
यहां करें शिकायत
अस्पतालों की मनमानी की शिकायत के लिए यूटी स्वास्थ्य विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिन पर संपर्क करके मरीज अस्पताल में ओवरचार्जिंग की शिकायत कर सकते हैं।
9779558282
0172-2752038
0172-2728703
0172-2752063
0172-2549524