ईडी के मुताबिक तलाशी में परिसर से मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव और 32 लाख रुपये भी जब्त किए गए। मार्च में सीबीआई ने विधायक के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ईडी ने सीबीआई की इसी प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन मामले की जांच की।
दरअसल, बैंक ऑफ इंडिया की लुधियाना के मॉडल टाउन शाखा ने एकमात्र बैंकिंग व्यवस्था के तहत 23 सितंबर, 2011 को स्टॉक और बही ऋण के नजरबंदी के मुकाबले कुल 35 करोड़ रुपये की नकद ऋण सीमा पर ऋण स्वीकृत किया था। फरवरी 2014 में 6.00 करोड़ रुपये की तदर्थ सीमा भी मंजूर की गई थी, जिसे कंपनी द्वारा चुकाया जाना बाकी है। ईडी ने कहा कि टीसीएल के खाते को 31 मार्च 2014 को एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) घोषित किया गया था।
कुल बकाया 76 करोड़ रुपये है और जसवंत सिंह, बलवंत सिंह, कुलवंत सिंह और तेजिंदर सिंह तारा कॉर्पोरेशन लिमिटेड के ऋण खाते में निदेशक और गारंटर थे।जब मई 2016 में बैंक द्वारा एक नई आरओसी (कंपनियों के रजिस्ट्रार) की तलाशी शुरू की गई तो यह देखा गया कि कंपनी के निदेशकों (बैंक की पूर्व अनुमति के बिना) को बदल दिया गया और कृपाल सिंह तिवाना, हरीश कुमार और लखबीर सिंह को टीसीएल का निदेशक नियुक्त किया गया था और प्रमुख व्यक्ति बलवंत सिंह ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में बलवंत सिंह को भी 25 मई, 2016 से कंपनी के निदेशक के रूप में फिर से नियुक्त किया गया था। एजेंसी ने कहा कि उपलब्ध सूचना के आधार पर उक्त व्यक्तियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच शुरू की गई ताकि अपराध की आय को वैध बनाने के लिए की गई मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का पता लगाया जा सके।