स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका भेज कर धोखाधड़ी करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बुधवार को सेक्टर-22सी, सेक्टर-34ए और सेक्टर-44सी स्थित रेड लीफ, इंफोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन सहित अन्य इमिग्रेशन कंपनियों में रेड की।
दरअसल, कुछ दिन पहले अमेरिकी सरकार ने वहां बिना वर्क वीजा या अन्य गलत रास्तों के जरिये एंट्री कर वहां रहने वाले कई राज्यों के युवाओं को डिपोर्ट किया था। इनमें सबसे अधिक युवा हरियाणा और पंजाब के थे। डिपोर्ट किए गए युवाओं के साथ कुछ महिलाएं भी थीं जिन्हें बेड़ियों में जकड़कर लाया गया था। इसके चलते दिल्ली दूतावास मुख्यालय की ओर से कई इमिग्रेशन कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज करवाए गए हैं। इन मामलों में अब ईडी की टीमों ने अपने स्तर पर धन शोधन के तहत जांच करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। ईडी की जांच में सामने आया कि इमिग्रेशन कंपनियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई या काम करने के इच्छुक अयोग्य वीजा आवेदकों के शिक्षा प्रमाण पत्र और अनुभव पत्रों में फर्जीवाड़ा कर इन्हें विदेश भेज दिया।
जांच में सामने आया है कि इमिग्रेशन कंपनी संचालकों ने गलत तथ्यों और दस्तावेजों में हेराफेरी कर विभिन्न वीजा आवेदकों को संयुक्त राज्य अमेरिका का वीजा दिलाने के लिए गलत तरीके से मदद की। इसके एवज में कंपनियों ने वीजा लगवाने वालों से कई-कई लाख रुपये भी लिए। इस राशि को संचालकों ने कंपनी के खाते में नहीं बल्कि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया।
विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों की बात करें तो पुलिस ने चंडीगढ़ में ही पिछले एक साल में 116 इमिग्रेशन कंपनियों के खिलाफ 190 एफआईआर दर्ज की हैं। शहर में इस समय करीब 550 से अधिक फर्जी इमिग्रेशन कंपनियां चल रही हैं। पिछले एक साल में करीब 250 करोड़ की धोखाधड़ी केवल इमिग्रेशन के जरिये हुई है। वहीं, मोहाली में 222 एफआईआर दर्ज हुईं।