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Highcourt: एजेएल प्लॉट आवंटन मामला, ईडी की याचिका पर एजेएल और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा को नोटिस

Fri, 02 Feb 2024 10:12 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

ईडी के विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अरविंद मौदगिल ने तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग अलग अपराध है, ऐसे में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक के आधार पर ईडी की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। ईडी की विशेष अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने की कार्यवाही पर इस आधार पर रोक लगा दी थी कि वर्तमान मामले में जांच अभी भी प्रगति पर है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित अन्य पर आरोप तय करने की प्रक्रिया पर लगाई गई रोक के आदेश को ईडी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एजेएल व भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अब तक की गई जांच से पता चला है कि तत्कालीन सीएम भूपेंद्र हुड्डा व अन्य अधिकारियों ने अपनी आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग कर पंचकूला में औद्योगिक प्लॉट एजेएल को पुन: आवंटित किया था। हरियाणा अर्बन डवलपमेंट अथॉर्टी (हुडा-वर्तमान में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण(एचएसवीपी)) की नीति के अनुसार एक बार एक प्लॉट का आवंटन रद्द हो जाए तो दोबारा आवेदन के समय की पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार ही पुन: आवंटन शुरू किया जा सकता है।

1982 में हुडा ने प्लॉट एजेएल को आवंटित किया था, परंतु 10 साल तक कोई निर्माण न होने के चलते 1992 में इसे वापस ले लिया गया था। इसके खिलाफ अपील दाखिल की गई परंतु हुडा प्रशासक और हरियाणा के वित्तीय आयुक्त ने 1995 और 1996 में इसे खारिज कर दिया था। आरोप के अनुसार जब 2005 में भूपेंद्र हुड्डा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पुन: आवंटन की अनुमति दे दी। अक्तूबर 2014 में मनोहर लाल के सीएम बनने पर राज्य सतर्कता ब्यूरो ने आवंटन में कथित अनियमितताओं के चलते हुडा को भारी वित्तीय नुकसान होने की बात कहते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी। बाद में मामला सीबीआई और ईडी के पास चला गया।
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दोनों मामलों का ट्रायल पंचकूला की सीबीआई व ईडी की अदालतों में चल रहा था। सीबीआई की कार्रवाई को हुड्डा व एजेएल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के आगे कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी। 

इसी आदेश को आधार बनाते हुए ईडी की अदालत ने 19 अप्रैल 2022 को आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इस रोक को हटाने के लिए ईडी ने निचली अदालत में अर्जी दाखिल की लेकिन पंचकूला में मौजूद ईडी अदालत ने 30 अगस्त 2023 को इस आवेदन को रद्द कर दिया। 

इस मामले में अब ईडी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह पीएमएलए के तहत आरोप तय करने की कार्यवाही फिर से शुरू करना चाहते हैं। ऐसे में ईडी कोर्ट का आदेश रद्द किया जाए। ईडी के विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अरविंद मौदगिल ने तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग अलग अपराध है, ऐसे में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक के आधार पर ईडी की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। ईडी की विशेष अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने की कार्यवाही पर इस आधार पर रोक लगा दी थी कि वर्तमान मामले में जांच अभी भी प्रगति पर है और अपराध की आय का निर्धारण अभी भी लंबित है। ईडी की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस विकास बहल ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 9 अप्रैल तक इस मुद्दे पर जवाब मांगा है।

बड़े अधिकारियों के नाम आए थे सामने
एजेएल प्लॉट आवंटन का मामला 22 दिसंबर 2016 को सीबीआई को सौंपा गया था और 5 अप्रैल 2017 को हुडा के तत्कालीन अध्यक्ष, तत्कालीन वित्तीय आयुक्त, मैसर्स एजेएल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य प्रशासक आदि के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार अधिनियम में मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने जांच के बाद एजेएल, मोती लाल वोरा और भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

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