लॉकडाउन की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों के काम धंधे चौपट हो गए हैं। कोरोना वायरस ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी आर्थिक तौर पर बड़ा झटका दिया है। अनलॉक-5 के शुरू होने के बाद भी शहर की अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। पिछले साल के मुकाबले सितंबर महीने में भी सकल (ग्रॉस) जीएसटी संग्रह में 10 फीसदी की कमी आई है।
माल और सेवा कर (जीएसटी), आबकारी और मूल्य वर्धित कर (वैट) चंडीगढ़ प्रशासन के खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बड़ा असर भी इन्हीं पर पड़ा है। सिर्फ जीएसटी के संग्रह में पिछले साल सितंबर के मुकाबले 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सितंबर 2019 में जीएसटी संग्रह करीब 157 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 141 करोड़ रुपये ही आया है। पिछले महीने अगस्त में भी जीएसटी संग्रह में 13 फीसदी की कमी देखी गई थी।
अप्रैल और मई महीने में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से कर संग्रह भारी कमी आई। अप्रैल और मई महीने में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को कर संग्रह में कुल 342 करोड़ का घाटा हुआ। जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है। वहीं, हैरानी की बात है कि पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जीएसटी संग्रह हुआ है। पिछले साल के मुकाबले सितंबर महीने में पंजाब ने 5 प्रतिशत तो हरियाणा ने 15 प्रतिशत ज्यादा जीएसटी संग्रह किया है।