चंडीगढ़। ऐसे बच्चे जिनमें हृदय की कार्य प्रणाली बिल्कुल उलट होती है, उनकी जान बचाने में इकोकार्डियोग्राफी का अहम रोल है। इन बच्चों में हृदय संबंधी सर्जरी में डायग्नोसिस से लेकर सर्जरी की प्रक्रिया तक बिल्कुल अलग होती है। ऐसे में सर्जरी के दौरान कई बार ऐसी चूक हो जाती है जिससे उनकी जान चली जाती है। लेकिन इकोकार्डियोग्राफी के जरिए उन विशेष बच्चों की सर्जरी की बारीकियों को समझने और करने में सफलता दर तेजी से बढ़ रही है। इकोकार्डियोग्राफी का परिणाम यह है कि ऐसे बच्चों में सर्जरी के बाद मृत्युदर का आंकड़ा महज 10 वर्षों में 50 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत पर आ गया है। यह जानकारी पीजीआई के डीन एकेडमिक व एनेस्थिसिया विभाग के प्रमुख प्रो. जीडी पुरी ने विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में दूसरे दिन शनिवार को दी।
उन्होंने बताया कि विशेष बच्चों में हृदय के जिस वॉल्व से फेफड़े में और जिस वॉल्व से शरीर के अलग-अलग भाग में रक्त की आपूर्ति होती है, वे ठीक उल्टा काम करते हैं। इसकारण उसकी कार्य प्रणाली समझने में कठिनाई होती है। लेकिन इस जांच के आधार पर सर्जरी करना बेहद आसान हो गया है।
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वेंटिलेटर पर कब तक रहना है यह भी इकोकार्डियोग्राफी करता है तय
एनेस्थिसिया विभाग की डॉ. बानाश्री ने आईसीयू के सर्जरी वाले मरीजों में इकोकार्डियोग्राफी के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों में हार्ट की सर्जरी के बाद उसकी कार्यक्षमता खराब हो जाती है, उसे ठीक होने में समय लगता है। उस दौरान उसे वेंटिलेटर के सपोर्ट पर कब तक रखा जाना है, इसका निर्णय भी इकोकार्डियोग्राफी की रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाता है।
सर्जरी की गुणवत्ता सुधार में भी सहायक
कार्यशाला में डॉ. भूपेश ने हार्ट की सर्जरी में बेहतर परिणाम के लिए इकोकार्डियोग्राफी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई केस में ओटी टेबल पर सर्जरी के दौरान एनेस्थिसियोलॉजिस्ट इकोकार्डियोग्राफी के जरिए सर्जरी की सही दिशा जांचता है। उस दौरान अगर सर्जरी की सफलता को लेकर कोई संदेह उत्पन्न होता है तो उसे इको की डायग्नोसिस के आधार पर तत्काल ठीक लिया जाता है। यह सर्जरी की सफलता दर बढ़ाने का काम करता है।
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कार्यशाला में विश्वभर के विशेषज्ञ दे रहे हैं जानकारी
प्रो. पुरी ने बताया कि कार्यशाला में अमेरिका और यूरोप के इंटरनेशनल फैकल्टी भी ऑनलाइन हिस्सा ले रहे हैं। प्रो. वांडा मिलर हांस, डॉ. स्वाति चौधरी और टेक्सास चिल्ड्रन हॉस्पिटल ह्यूस्टन से डॉ. शगुन सचदेवा, क्लीवलैंड क्लिनिक से डॉ. शिवमूर्ति साले, फिलाडेल्फिया सेडॉ. हरिकेश सुब्रमण्यम, आयोवा के डॉ. सुधाकर और बोस्टन यूएसए से डॉ. संकल्प सहगल कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।