चंडीगढ़। पीजीआई में इकोकार्डियोग्राफी पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन विशेषज्ञों ने कोविड-19 के दौरान गंभीर मरीजों की जान बचाने में इस तकनीक के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि कोविड-19 वाले आईसीयू के मरीजों पर इस तकनीक का बेहद कारगर प्रभाव पड़ा। कोविड के कारण फेफड़ों के खराब होने से हृदय पर बढ़ते दबाव को जानने में इकोकार्डियोग्राफी से मदद ली गई। इसके परिणामस्वरूप समय रहते उन मरीजों में हृदय की क्षमता का इलाज शुरू कर उनकी जान बचाने में सफलता प्राप्त की गई।
प्रो. पुरी ने बताया कि इकोकार्डियोग्राफी जैसे महत्वपूर्ण तकनीक को समझने और प्रक्रिया में लाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस सम्मेलन का विश्वव्यापी प्रभाव सामने आने लगा है। 16 वर्षों के दौरान पीजीआई के विशेषज्ञों ने इस सम्मेलन के माध्यम से एक हजार से ज्यादा ऐसे विशेषज्ञ तैयार किए हैं जो इकोकार्डियोग्राफी की मदद से देश विदेश में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
सम्मेलन के अंतिम दिन क्लीवलैंड क्लिनिक के डॉ. शिवा सेल, फिलाडेल्फिया के डॉ. हरिकेश सुब्रमण्यम, आयोवा के डॉ. सुधाकर ने एओर्टिक डिसेक्शन और एलवीएडी की जानकारी दी। वहीं, अन्य विशेषज्ञों ने वॉल्व, प्रोस्थेटिक वॉल्व, ईसीएमओ में इको और हार्ट ट्रांसप्लांट के 2डी और 3डी मूल्यांकन पर चर्चा की।
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डॉ. शुभश्री नियोगी को मिला प्रथम पुरस्कार
इस अवसर पर डॉ. शुभश्री नियोगी को शैशवावस्था में हृदय शल्य चिकित्सा से गुजरने वाले जन्मजात हृदय रोग के रोगियों में फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप की पुष्टि पर इकोकार्डियोग्राफी स्ट्रेन मापन के अध्ययन के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। दूसरे और तीसरे पुरस्कार पाने वाले अन्य डॉक्टरों में डॉ. हितेशी और डॉ. निश्चिता थी। वहीं कोविड के दौरान एसीसी के नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों को पोस्टोप कॉर्डियक सर्जरी के रोगियों की देखभाल में उनके योगदान के लिए प्रशंसा पुरस्कार भी दिए गए।