भारतीय मानक ब्यूरो ने विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारियों के आधार पर पूरे भारत को पांच भूकंपीय जोन में बांटा है। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक जोन 5 है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 9 तीव्रता का भूकंप आ सकता है। चंडीगढ़ और इसके आसपास के इलाके को भूवैज्ञानिकों ने जोन 4 में रखा है। इस क्षेत्र में 7.9 तीव्रता तक का भूकंप आ सकता है, जिससे व्यापक तौर पर जनहानि संभव है।
कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञ ने बताया है खतरा
कुछ साल पहले कानपुर आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. जावेद मलिक ने अपने एक शोध पेपर में बताया था कि चंडीगढ़ सिस्मिक रिस्क जोन में आता है। चंडीगढ़ के नजदीक एक एक्टिव फाल्ट गुजर रही है, जो कई साल पहले आए भूकंप का साक्ष्य है। घग्गर नदी के दाहिने किनारे पर चंडीगढ़ के आसपास उत्तर-पश्चिमी हिमालयी तलहटी क्षेत्र में सक्रिय फॉल्ट निशान हैं। यह इस बात की भी संभावना बताते हैं कि भविष्य में उच्च तीव्रता के भूकंप की संभावना बहुत अधिक है।
भूकंप का केंद्र कहां पर है, इसका पता लगने के बाद ही डेटा विश्लेषण हो पाएगा। भूकंप का असर चंडीगढ़ और आसपास के इलाके में रहा है। कोई भी भूकंप यदि धरती के नीचे 10 किमी तक का है तो वो ज्यादा खतरनाक होता है। चंडीगढ़ भी संवेदनशील है, इसलिए लोग जागरूक रहें। - डॉ महेश ठाकुर, भूगर्भ विज्ञानी, पंजाब विश्वविद्यालय।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि भूकंप के बाद अमृतसर या पंजाब के अन्य हिस्सों में अब तक किसी भी नुकसान की कोई खबर नहीं है। राज्य के शीर्ष अधिकारी, पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थित पर नजर बनाए हुए है।