मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विनय कुमार के अनुसार जिले में मसूर और चने की खेती के लिए यह बरसात नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इसके चलते इन दोनों फसलों पर बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा आलू की फसल के लिए भी या नुकसानदायक है।
किसानों के लिए श्राप बनकर गिरे ओले
जालंधर में तेज बारिश व ओलावृष्टि किसानों के लिए श्राप बन गई है। बारिश व आसमान से ओले गिरने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि इस बारिश व ओलावृष्टि का गेहूं की फसल को कम नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन आलू, मटर, गोभी, गाजर व अन्य सब्जियों की फसल को काफी नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। अकेले जालंधर जिले में ही इस समय 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बीजी गई है, जो कि काफी हद तक पक कर तैयार है।
जानकारों का कहना है कि इस फसल को ओलावृष्टि से कुछ नुकसान तो होगा, लेकिन बारिश से इसका कोई खास नुकसान होने वाला नहीं है। इसके अलावा जिले में बीजी गई आलू, मटर, गोभी, गाजर की फसल को काफी नुकसान होने का अंदेशा है। इस समय जिले में 20 हजार हेक्टेयर में आलू व लगभग 5 हजार हेक्टेयर में मटर व अन्य सब्जियों की बीजाई की गई है, जो कि इस बारिश व ओलावृष्टि के कारण किसानों को खून के आंसू रुला सकती है।
येलो रस्ट बीमारी से हो सकता है फसल को नुकसान: गुलाटी
इस बारे में कृषि अधिकारी नरेश गुलाटी का कहना है कि बारिश व तेज हवा के कारण फसलों में एक बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है, जिसे येलो रस्ट (पीली कुंगी) कहते हैं। यह बीमारी हवा के साथ ही फैल जाती है, जिससे पौधे पर पीला पाउडर दिखने लगता है जो कि गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह है।
बारिश व ओलावृष्टि के बारे में बागवानी विभाग, चंडीगढ़ के अधिकारी का कहना है कि ओलावृष्टि में नाइट्रोजन होती है, जो कि गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद होती है। इसका नुकसान तब होता है, जब ओलावृष्टि के कारण फसल बैठ जाए। बाकी यह बारिश व ओलावृष्टि सब्जियों की फसल के लिए श्राप बनेगी।