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पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश के साथ ओलावृष्टि, बादलों की गर्जना ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Thu, 07 Feb 2019 10:20 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में जोरदार बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई
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तड़के से ही पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में जोरदार बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। पंजाब के कई इलाकों से ओलावृष्टि की खबर है। बारिश से जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है वहीं किसानों के चेहरे पर सिकन बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो एक-दो दिन और मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। पंजाब और चंडीगढ़ में सुबह से ही अंधेर छा गया और तेज बारिश शुरू हो गई। पंजाब के फिरोजपुर और लुधियाना में ओलावृष्टि की खबर है।हरियाणा के कैथल में भी ओले पड़े। ओलो के साथ हुई बारिश ने ठंड बढ़ा दी है।

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हरियाणा के भिवानी और बहादुरगढ़ में तेज बारिश हुई। वहीं बवानीखेड़ा में ओलावृष्टि की खबर है। दिनभर हुई रुक-रुक कर बारिश ने पूरी तरह से जन जीवन अस्त-व्यस्त रहा। ज्यादातर लोग घरों में ही दुबके रहे। वहीं सर्द हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में कोहरा पड़ने के आसार हैं।

लोग ऑफिस और काम पर लेट पहुंचे। बता दें कि पिछले दिनों मौसम विभाग ने ओलावृष्टि और तेज बारिश का अनुमान लगाया था। जम्मू कश्मीर के आस-पास पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने चलते उत्तर भारत में और बरसात हो सकती है। तेज हवाएं भी चल रही हैं जिससे आने वालों दिनों में ठंड में इजाफा देखने को मिलेगा।
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24 घंटे से ज्यादा समय से जारी बरसात के चलते जहां होशियारपुर जिले में गेहूं किसानों और गन्ना किसानों के चेहरे खिले हैं, वहीं सब्जियों आलू उत्पादकों और किन्नू उत्पादकों के रंग उड़े दिख रहे हैं। होशियारपुर जिले में कंडी इलाके और पर्वतीय प्रभाव के चलते गेहूं आदि फसलों की बिजाई करीब 20 दिन देरी से होती है, जिसके चलते फिलहाल है इस बरसात का गेहूं को कोई नुकसान नहीं हुआ। अगर बरसात दो 1 दिन और खींच गई तो यही वरदान आकाश से बरसा कहर भी साबित हो सकता है।

जालंधर में भी गिरे ओले
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विनय कुमार के अनुसार जिले में मसूर और चने की खेती के लिए यह बरसात नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इसके चलते इन दोनों फसलों पर बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा आलू की फसल के लिए भी या नुकसानदायक है। 

किसानों के लिए श्राप बनकर गिरे ओले
जालंधर में तेज बारिश व ओलावृष्टि किसानों के लिए श्राप बन गई है। बारिश व आसमान से ओले गिरने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि इस बारिश व ओलावृष्टि का गेहूं की फसल को कम नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन आलू, मटर, गोभी, गाजर व अन्य सब्जियों की फसल को काफी नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। अकेले जालंधर जिले में ही इस समय 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बीजी गई है, जो कि काफी हद तक पक कर तैयार है।
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आलू के खेत में भरा पानी
जानकारों का कहना है कि इस फसल को ओलावृष्टि से कुछ नुकसान तो होगा, लेकिन बारिश से इसका कोई खास नुकसान होने वाला नहीं है। इसके अलावा जिले में बीजी गई आलू, मटर, गोभी, गाजर की फसल को काफी नुकसान होने का अंदेशा है। इस समय जिले में 20 हजार हेक्टेयर में आलू व लगभग 5 हजार हेक्टेयर में मटर व अन्य सब्जियों की बीजाई की गई है, जो कि इस बारिश व ओलावृष्टि के कारण किसानों को खून के आंसू रुला सकती है।  

येलो रस्ट बीमारी से हो सकता है फसल को नुकसान: गुलाटी
इस बारे में कृषि अधिकारी नरेश गुलाटी का कहना है कि बारिश व तेज हवा के कारण फसलों में एक बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है, जिसे येलो रस्ट (पीली कुंगी) कहते हैं। यह बीमारी हवा के साथ ही फैल जाती है, जिससे पौधे पर पीला पाउडर दिखने लगता है जो कि गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह है। 

बारिश व ओलावृष्टि के बारे में बागवानी विभाग, चंडीगढ़ के अधिकारी का कहना है कि ओलावृष्टि में नाइट्रोजन होती है, जो कि गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद होती है। इसका नुकसान तब होता है, जब ओलावृष्टि के कारण फसल बैठ जाए। बाकी यह बारिश व ओलावृष्टि सब्जियों की फसल के लिए श्राप बनेगी।
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