चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में इलाज और निर्माण का टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। फीमेल सर्जिकल वार्ड में सर्जरी के बाद भर्ती महिलाएं जहां दिनभर चल रही ठोका-पीटी और उड़ती धूल के बीच इलाज को मजबूर हैं, ठीक यही स्थिति मेल सर्जिकल वार्ड की भी है। वहीं, अब यही मॉडल अस्पताल की इमरजेंसी में लागू किया जा रहा है। करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से इमरजेंसी के रिनोवेशन और विस्तार का काम शुरू हो चुका है लेकिन मरीजों को पूरी तरह शिफ्ट करने की ठोस योजना नहीं बनाई गई है।
44-44 बेड वाले फीमेल और मेल सर्जिकल वार्ड में इस समय आधे वार्ड में मरीज भर्ती हैं और आधे हिस्से में मजदूर रिनोवेशन का काम कर रहे हैं। टाइल कटाई, ड्रिलिंग और सीमेंट-बालू के कणों से पूरा वार्ड धूल में डूबा है। सर्जरी के बाद भर्ती महिलाओं और पुरुषों को लगातार खांसी हो रही है जिससे उनके ताजा टांके तक प्रभावित हो रहे हैं। बावजूद इसके मरीजों को कहीं और शिफ्ट नहीं किया गया है। मरीजों को संक्रमण का खतरा भी मंडरा रहा है।
अब इमरजेंसी बिल्डिंग में रिनोवेशन और निर्माण कार्य भी शुरू
महिला और पुरुष वार्ड की यह तस्वीर अब इमरजेंसी सेवाओं में भी दोहराने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी बिल्डिंग के रिनोवेशन और निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इमरजेंसी ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर बड़े स्तर पर निर्माण और रिनोवेशन होगा। निर्माण के चलते इमरजेंसी परिसर में लंबे समय तक टाइल कटाई, केबलिंग, पाइप लाइन बिछाने और ड्रिलिंग जैसे काम चलते रहेंगे। निर्माण कार्य 24 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ है और इसकी अवधि 12 महीने तय की गई है। दो करोड़ की लागत से यहां कई कार्य किए जाने हैं। पुरानी इमरजेंसी के रिनोवेशन के साथ ही दो फ्लोर की नई बिल्डिंग भी बनाई जाएगी। बावजूद इसके इमरजेंसी के मरीजों को पूरी तरह किसी वैकल्पिक जगह शिफ्ट नहीं किया जा रहा है।
डॉक्टर और स्टाफ भी चिंतित
अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि इमरजेंसी और आईसीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शोर, धूल और लगातार आवाजाही से इलाज बाधित होना तय है। इंफेक्शन का खतरा बढ़ने के साथ-साथ मॉनिटरिंग और आपात रिस्पॉन्स पर भी असर पड़ सकता है।
इमरजेंसी में क्या-क्या होगा निर्माण
ट्रायज रूम का विस्तार, जिसमें प्रत्येक फ्लोर पर 10-10 बेड की व्यवस्था होगी
मरीजों और स्टाफ की आवाजाही के लिए नए कॉरिडोर
नर्सिंग स्टेशन और सर्विस एरिया
दिव्यांगों और महिलाओं के लिए शौचालय
जेंट्स टॉयलेट और वॉटर क्लोजेट
प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन के लिए ओपन-टू-स्काई एरिया
मरीजों के लिए स्ट्रेचर लिफ्ट
तकनीकी सिस्टम पर भी होगा बड़ा काम
कई अहम तकनीकी सिस्टम लगाए जाएंगे
इलेक्ट्रिकल कार्य :
स्ट्रेचर लिफ्ट की व्यवस्था
फायर सेंसिंग और अलार्म सिस्टम
पब्लिक हेल्थ कार्य :
मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम
हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग
फायर फाइटिंग सिस्टम
कोट..
इमरजेंसी सीसीयू को पहली मंजिल पर शिफ्ट किया जाएगा, पूरी इमरजेंसी को शिफ्ट नहीं किया जा रहा है।
डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक