संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। कालीबाड़ी और बंग भवन में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। वीरवार का महाष्टमी की पूजा की गई। शुक्रवार से इसे सभी भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा ताकि वे भी पंडाल में जाकर मां का दर्शन कर सकें। मां की आमंत्रण पूजा की गई। बंग भवन में शाम की आरती को ऑनलाइन प्रसारण किया गया।
इस बार कोरोना के चलते दुर्गा पूजा के दौरान सरकार के दिशा-निर्देशों का पूरा पालन किया जा रहा है। किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा। केवल पूजा होगी। वहीं भक्त मां दुर्गा को पुष्प भी अर्पित नहीं कर पाएंगे। कालीबाड़ी में मां के दर्शन के लिए समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक और शाम साढ़े चार बजे से शाम छह बजे तक ही होगा। दशमी को मां दुर्गा की विदाई होगी। इससे पहले पूजा के बाद महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती है। बंगाल में इसे सिंदूर खेला कहा जाता है, लेकिन इस बार केवल मां को ही सिंदूर लगाया जाएगा।
कालीबाड़ी के सचिव राजेश राय ने बताया कि भक्तों के दर्शन के लिए निशान बनाए गए हैं। एक बार में 25 लोगों के अंदर जाने का इंतजाम होगा। जब पच्चीस भक्त दर्शन करने के बाद बाहर जाएंगे तो उसके बाद बाहर के लोगों को दर्शन के लिए अंदर आने दिया जाएगा।
सुबह साढ़े छह से दोपहर दो बजे होंगे मां का दर्शन
बंगिया सांस्कृतिक सम्मिलनी के सांस्कृतिक सचिव अनिंदु दास और सांस्कृतिक संयोजक भवानी पाल ने बताया कि कोरोना के कारण सेक्टर-35 स्थित बंग भवन में जो भी भक्त आएंगे, वे रजिस्टर में नाम, पता और फोन नंबर दर्ज करने के बाद ही दर्शन के लिए पंडाल में जा सकेंगे। पंडाल में जाने से पहले प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग के साथ हाथों को सैनिटाइज के बाद ही प्रवेश मिलेगा। बिना मास्क के भी पंडाल में नहीं जा सकेंगे। सुबह साढ़े छह बजे से लेकर दोपहर बाद दो बजे तक ही मां के दर्शन होंगे। बंगिया सांस्कृतिक सम्मिलनी के प्रधान अशोक डे सरकार और सचिव दिव्येंदु दास ने बताया कि मां की छोटी प्रतिमा स्थापित की जाएगी ताकि विसर्जन के लिए परेशानी न हो। वहीं यदि विजर्सन की अनुमति नहीं मिली तो मां का विसर्जन बाद में करेंगे।