डंपिंग ग्राउंड में मशीनरी के नाम पर डीजल और बिलों का खेल, कमीशनखोरी के आरोपों से घिरा एमओएच विंग
पांच लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा न्यायिक हिरासत में, ठेकेदार की मशीनरी और निगम के डीजल खर्च पर उठे सवाल
ठेकेदार प्रशांत भदौरिया की शिकायत पर सीबीआई ने की कार्रवाई, एफआईआर में जॉइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह, एसीएफए संदीप सेठी समेत कई अधिकारियों के नाम
चंडीगढ़। नगर निगम के डंपिंग ग्राउंड में कचरे की लेवलिंग के लिए लगाई गई मशीनरी, उसके संचालन और डीजल खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ठेकेदार प्रशांत भदौरिया की शिकायत पर सीबीआई ने 7 अक्तूबर को सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप है कि शक्ति शर्मा ठेकेदार से कमीशन की मांग कर रहा था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। इस कार्रवाई के बाद डंपिंग ग्राउंड में ठेकेदार और नगर निगम की मशीनरी के इस्तेमाल, डीजल की खपत और बिलों के भुगतान की जांच अहम हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार प्रशांत भदौरिया की मशीनरी में तीन जेसीबी, तीन चेन डोजर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और दो टीपर शामिल हैं। इनमें एक चेन डोजर खराब हालत में दिखाई दिया। सवाल यह है कि यदि मशीनरी काम करने की स्थिति में नहीं थी तो क्या उसे भी बिलों में चालू दिखाकर भुगतान लिया गया? इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और मशीनों के संचालन के ब्योरे से ही हो सकेगी।
निगम की मशीनरी खड़ी, डीजल खर्च पर सवाल
डंपिंग ग्राउंड के एक तरफ नगर निगम की जेसीबी, दो टीपर और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े होने की बात सामने आई है। आरोप है कि ये वाहन दिनभर काम नहीं करते, जबकि इनके लिए डीजल खर्च का हिसाब भी जांच के दायरे में आना चाहिए। निगम के पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया जाता है। ऐसे में ईंधन की वास्तविक खपत, वाहनों की लॉगबुक और काम के घंटों का मिलान जरूरी है। यह भी आरोप है कि निगम की कुछ मशीनरी डंपिंग ग्राउंड के बजाय दूसरे कामों में लगाई जाती रही, जबकि डीजल का खर्च डंपिंग ग्राउंड के नाम पर दर्ज होता था।
पहले भी परिवार की मशीनरी को ठेका मिलने का दावा
सूत्रों के अनुसार प्रशांत भदौरिया से पहले डंपिंग ग्राउंड की मशीनरी का ठेका सैनिटरी इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह के पिता हरदेव सिंह के पास कई वर्षों तक रहा। उनकी मशीनरी में दो चेन डोजर, दो जेसीबी और तीन टीपर शामिल बताए गए हैं। उस समय निगम के पास अपना पेट्रोल पंप नहीं था। आरोप है कि कागजों में निगम और ठेकेदार की मशीनरी के लिए डीजल दर्ज होता था, जबकि वास्तविक संचालन सीमित समय तक किया जाता था।
उस दौरान शक्ति शर्मा डंपिंग ग्राउंड पर सैनिटरी इंस्पेक्टर और संदीप धनकड़ चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर थे। धनकड़ को बाद में हेल्थ सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत किया गया। अगस्त 2023 में सीबीआई ने उन्हें एक लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इसके बाद कुलबीर सिंह चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर बने। आरोप है कि उनके कार्यकाल में भी हरदेव सिंह की मशीनरी का ठेका रद्द नहीं हुआ।
14 बिलों के भुगतान की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
शिकायत से जुड़े आरोपों के अनुसार ठेकेदार के पिछले 14 बिलों की कुल राशि करीब 1.40 करोड़ रुपये थी और कथित तौर पर 14 लाख रुपये कमीशन मांगा गया था। पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपये देने की मांग की शिकायत के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की। हालांकि, कमीशन की कथित मांग और भुगतान प्रक्रिया में अन्य अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। ठेकेदार की ओर से दर्ज एफआईआर में जॉइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह, एसीएफए संदीप सेठी, चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा और सैनिटरी इंस्पेक्टर नितीन के नाम शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभी तक सीबीआई ने अन्य अधिकारियों को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है।
निगम के बिलों की मंजूरी प्रक्रिया में एमओएच विंग की भूमिका भी अहम है। आरोप है कि बिल पहले संबंधित शाखा से हस्ताक्षरित होकर जॉइंट कमिश्नर और फिर एसीएफए के पास मंजूरी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मशीनरी के नंबर, लॉगबुक, डीजल की खपत और भुगतान रिकॉर्ड का मिलान इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है। आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही होगी।