चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने पीयू के अफसरों को साफ संदेश दिया है कि भले ही उनके पास मिलने के लिए समय न हो, लेकिन डीयूआई व डीन रिसर्च वरिष्ठता के क्रम में ही रहें।
उन्होंने कहा कि यदि इसमें अनावश्यक बदलाव करने की कोशिश की गई तो परिणाम ठीक नहीं होंगे। पुटा इसके लिए बैठक करके आगामी रणनीति बनाएगी। पुटा के पदाधिकारियों का कहना है कि यहां के अफसर शिक्षकों की समस्या समाधान के लिए तैनात हैं, लेकिन पुटा के कार्यकर्ताओं से अफसर नहीं मिलना चाहते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे शिक्षकों में आक्रोश है।
पुटा ने वीसी को लिखे पत्र में कहा है कि शिक्षकों के तमाम लंबित मुद्दों का हल किया जाए। कैश प्रमोशन के लिए चयन समितियां बनाकर जल्द प्रक्रिया शुरू की जाए। शिक्षकों को पदोन्नति का हक बिना मांगे मिलना चाहिए। वर्ष 2018 में डॉ. भूपिंदर सिंह पाली का साक्षात्कार आदि पदोन्नति के लिए हो चुका है, लेकिन उन्हें इसका लाभ अभी तक नहीं दिया गया है। यह मामला कई बार उठाया गया। अधिकारियों से मिलकर संबंधित शिक्षक ने इस बारे में बताया भी, लेकिन बात नहीं बनी। पुटा ने कहा है कि जल्द इस प्रकरण पर निर्णय लिया जाए।
कुछ सीनेटरों ने डीयूआई की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल
सीनेट की बैठक में डीयूआई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए थे। कुछ सीनेटरों ने कहा था कि उन्हें बदला जाना चाहिए। कर्मचारी नेताओं ने भी सवाल उठाए थे। हालांकि कई लोग डीयूआई को बेहतर वैज्ञानिक भी बता रहे थे। डीयूआई प्रो. वीआर सिन्हा का एक साल का कार्यकाल सोमवार को पूरा हो रहा है। अंदेशा है कि कहीं पीयू के अधिकारी मनमाने तरीके से उन्हें न बदल दें। इसी को पुटा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा है कि डीयूआई एक बेहतर अधिकारी हैं, जिनका योगदान पीयू को आगे ले जाने में रहा है। वह वरिष्ठता में सबसे आगे हैं। ऐसे में वरिष्ठता सूची को अफसर प्रभावित न करें। उन्होंने कहा है कि वरिष्ठता के अनुसार ही आज तक बड़े पदों पर तैनाती की जाती रही है। यह नियम न तोड़ा जाए।
प्रो. दीपक गुप्ता का वेतन जारी करें अफसर
डेंटल कॉलेज के शिक्षक प्रो. दीपक गुप्ता को दो माह का वेतन नहीं दिया गया। वेतन अकारण रोका गया है। यह एक तरह का शोषण है। उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। पीयू के अधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से लें और वेतन जारी करें। कहा कि पुटा शिक्षकों के साथ हमेशा खड़ी है। शिक्षकों का शोषण किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।