दो राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित पंजाब के गांव मसोल में सिर्फ 5वीं तक का स्कूल है। इसी कारण से यहां के ज्यादातर बच्चे आगे की पढ़ाई छोड़ देते हैं। वहीं, कोरोना काल में बच्चों और उनके परिजनों की दिक्कत और ज्यादा बढ़ गई है। क्योंकि गांव में मोबाइल के सिग्नल नहीं आते। इसका खामियाजा ऑनलाइन पढ़ने वाले बच्चों से लेकर आम लोगों को रोजाना हो रहा है। पहाड़ चढ़ने पर मोबाइल में सिग्नल आता है तो बच्चों को तपती धूप में मजबूरीवश अपनी ऑनलाइन क्लास लगवाने के लिए पहाड़ों पर जाना पड़ता है। वहां पर पेड़ या अस्थायी झोपड़ी के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है।
मसोल गांव में सिर्फ 5वीं तक ही स्कूल है। इसके बाद बच्चों को 10 से 12 किलोमीटर दूर पंजाब के नयागांव या हरियाणा की हद में पड़ते गांव बसौल में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इसके लिए बच्चों को पैदल आने-जाने में तकरीबन 3-4 घंटे लग जाते हैं। कुछ ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए ऊंट रखे हुए हैं। ग्रामीण बच्चों को ऊंट पर बैठाकर स्कूल छोड़कर आते हैं और फिर वापस लेकर आते हैं।