पंजाब पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने अमृतसर में तैनात फरार चल रहे डीएसपी वविंदर महाजन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि फार्मा कंपनियों की आड़ में ड्रग्स कारोबार को संरक्षण देने वाले डीएसपी ने एस्टर फार्मा कंपनी से 45 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। जांच के दौरान एएनटीएफ को यह सबूत मिले हैं। इस संबंध में भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 7 और 8 और एनडीपीएस अधिनियम की धारा 59 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
डीजीपी ने बताया कि एएनटीएफ ने मई 2024 में जॉइंट ऑपरेशन के दौरान समीलैक्स फार्माकेम ड्रग इंडस्ट्रीज में रेड की थी। टीम को ड्रग्स सप्लाई में बड़े स्तर पर खामियां मिली थीं। जब एएनटीएफ ने जांच शुरू की तो पता चला कि फार्मा कंपनियों की आड़ में ड्रग्स सप्लाई की जा रही है। इस मामले में लखनऊ का रहने वाला अखिल जय सिंह भी डीएसपी के साथ शामिल था। एएनटीएफ ने जब फार्मा कंपनी के प्लांट पर रेड की, तो टीम को 1.98 करोड़ प्रतिबंधित गोलियां और 40 किलोग्राम प्रतिबंधित साल्ट बरामद हुआ था। बड़ी संख्या में प्रतिबंधित ड्रग्स की खेप बरामद होने के बाद केस की जांच शुरू की थी।
एएनटीएफ के अनुसार डीएसपी महाजन और उसका साथी अखिल जय सिंह प्रदेश में कई फार्मा कंपनियों को प्रतिबंधित ड्रग्स के इस नेटवर्क को ऑपरेट करने में न केवल मदद करते थे, बल्कि उन पर ड्रग्स से जुड़े किसी भी मामले में कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए संरक्षण देते थे। अखिल जय सिंह फार्मा कंपनियों के साथ डीएसपी महाजन की मुलाकात कराता था। रिश्वत के पैसों को भी दोनों बराबर बांटते थे। एएनटीएफ के डीजीपी कुलदीप सिंह ने बताया कि इस मामले में दो गवाहों ने बयान दर्ज कराए हैं।
2023 में भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप
एएनटीएफ की टीम ने वीरवार को आरोपी डीएसपी की गिरफ्तारी को लेकर उसके घर और अन्य ठिकानों पर छापामारी की। उसकी गिरफ्तारी के लिए अमृतसर और बॉर्डर जोन ने अलर्ट जारी किया गया है। महाजन के घर से पुलिस ने कैश और नशे की गोलियां भी बरामद की है। दिसंबर 2023 में डीएसपी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था कि नशे के एक मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे का लेन-देन किया गया था। चार साल पहले वह इंस्पेक्टर से प्रमोट होकर डीएसपी बना था।