जो शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलते हैं। इनमें पुलिस को भी नहीं पता होता है कि मौत किन कारणों से हुई है और जिस व्यक्ति की मौत हुई है वो कौन है। इनकी मौत का कारण जानने के लिए विसरा जांच कराई जाती है। शव की छोटी आंत, आंत, लीवर या फिर गुर्दे को जांच के लिए भेजा जाता है। ज्यादातर मामलों में विसरा की रिपोर्ट सालो-साल बंद बोतलों में ही बंद रहती है।
शरीर के ये पार्ट रखे जाते हैं सुरक्षित
लीवर का टुकड़ा, छोटी आंत का टुकड़ा, खाने की थैली, स्पलीन (तिल्ली), किडनी
जरूरत पड़ने पर भेजा जाता है रिमाइंडर
शहर की फोरेंसिक लैब सेक्टर-36 में है। इस लैब में देश के अलग-अलग जगहों से रिपोर्ट के लिए विसरा आते हैं। इनमें चंडीगढ़ के भी सैकड़ों केस शामिल हैं। इनमें कुछ को छोड़ दें तो बाकी की रिपोर्ट लटक जाती है। सूत्रों के अनुसार अभी तक 700 से ज्यादा विसरा रिपोर्ट आनी बाकी है। जबकि पुलिस को जिस केस की विसरा रिपोर्ट लेनीे होती है, उसमें रिमाइंडर भेज दिया जाता है।