चीता ने ही अमृतसर के व्यापारी गुरदीप सिंह को मोहरा बना कर पाकिस्तान से नमक की बोरियों में 532 किलो हेरोइन मंगवाई थी। 2700 करोड़ की यह खेप यदि चीता के ठिकानों में पहुंच जाती तो उसे बेच कर बड़ी राशि कश्मीर के आतंकी संगठनों को पहुंचाई जानी थी। यही कारण था की ड्रोन से आने वाले हथियार आईएसआई के निर्देश पर तरनतारन व अमृतसर के सीमावर्ती गांवों में फेंके थे, ताकि स्लीपर सेलों तक इन हथियारों को पहुंचाकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची गई थी।
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चीता ने ड्रग मनी देकर हथियार खरीदने को कहा था
पंजाब पुलिस ने मंगलवार को तरनतारन के भिखीविंड इलाके में गिरफ्तार किये गए चीता के तीन सहयोगियों से जो हथियार बरामद किये गए हैं, वह भी चीता द्वारा तैयार किये स्लीपर सेल ही है। जानकारी के अनुसार, चीता ने ही इनको ड्रग मनी देकर हथियार खरीदने के लिए कहा था। लॉकडाउन के दौरान हिजबुल के गिरफ्तार आतंकी हिलाल अहमद से बरामद की गई 29 लाख की ड्रग मनी थी। अमृतसर से ही गिरफ्तार दो स्लीपर सेल बिक्रम सिंह उर्फ वीकी व मनिंदर सिंह उर्फ मनी से बरामद 32 लाख की राशि भी ड्रग मनी थी।
इन स्लीपर सेलों से बरामद राशि हिजबुल के आतंकवादियों तक पहुंचाई जानी थी। चीता का वीरवार को पांच दिन का पुलिस रिमांड खत्म हो रहा है। पुलिस उसे वीरवार को अदालत में पेश करेगी। इन पांच दिनों में चीता ने जांच के दौरान क्या उगला उसकी जानकारी पुलिस अदालत को देगी। चीता की गिरफ्तारी के बाद उसके द्वारा तैयार स्लीपर सेलों तक पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन स्पष्ट है की चीता की गिरफ्तारी ने सीमा पार से होने वाली हेरोइन की तस्करी के एक बड़े इंटरनेशनल गरोह का पर्दाफाश किया है।