फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉ. नेहा शौरी ने रद्द नहीं किया था बलविंदर का लाइसेंस, रिकॉर्ड से सामने आई बात, और तेज हुई जांच

Sat, 06 Apr 2019 01:06 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
विज्ञापन
ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. नेहा शौरी
विज्ञापन
डॉ. नेहा शौरी की हत्या का मामला पूरी तरह से उलझा हुआ है। अभी तक यह बात पुलिस साफ नहीं कर पाई है कि आखिर डॉ. शौरी की हत्या के पीछे वजह क्या थी। दूसरी तरफ फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की जांच में सामने आया कि बलविंदर सिंह का लाइसेंस 2009 में कैंसिल हुआ था। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसने इसके बाद दोबारा लाइसेंस के लिए आवदेन नहीं किया था।
विज्ञापन


सूत्रों से पता चला है कि नेहा शौरी ने बलविंदर सिंह की केमिस्ट शॉप पर 2009 में रेड की थी। वहीं, उसने अपनी रिपोर्ट में आरोपी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की थी, जबकि डॉ. नेहा की रिपोर्ट पर उस समय के एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर अजय सिंगला ने बलविंदर का लाइसेंस कैंसिल किया था। वह 2014 में रिटायर हो गए थे, क्योंकि उस समय डॉ. नेहा शौरी ड्रग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थीं। ऐसे में उसके पास लाइसेंस इश्यू या कैंसिल करने की पावर नहीं थी। 
Trending Videos
विज्ञापन

2011 में बना था जेएलए का पद

एफडीए के मुताबिक, 2011 से पहले एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर को ही लाइसेंस इश्यू और जारी करने का अधिकार था। 2011 में जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी (जेएलए) की पोस्ट बनी थी। डॉ. नेहा शौरी 2013 में जेएलए बनीं थीं।

26 लोगों को हो चुकी है सजा
एफडीए के कमिश्नर काहन सिंह पन्नू ने कहा कि तंदरुस्त पंजाब मुहिम के तहत दवाइयों की आड़ में नशा बेचने वालों पर विभाग काफी सख्ती से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2018 से विभाग अब तक 26 लोगों को नशे के केसों में सजा दिला जा चुका है। इनमें दोषियों को तीन से सात साल तक की सजा हुई है।

835 केमिस्टों के लाइसेंस किए सस्पेंड
एफडीए ने बताया कि गत आठ महीनों में एफडीए ने पूरे राज्य में 835 केमिस्ट शॉप के मालिकों के लाइसेंस सस्पेंड किए हैं, जबकि दस लाइसेंस कैंसिल किए गए हैं। वहीं, उनकी टीमों ने इस दौरान 216 केमिस्टों से करीब 1.78 करोड़ के ड्रग की बरामदगी की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें