पंजाब में नशा करने वालों में युवा ही नहीं, युवतियां भी आगे हैं। नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। नशा मुक्ति केंद्र बरनाला से मिली जानकारी के अनुसार हर माह 50 के करीब युवा नशा छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती होने आते हैं। केंद्र में सिर्फ 10 बेड होने के कारण उन्हें दवा देकर वापस भेज दिया जाता है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक माह में 16 से 24 साल के 30 युवक स्मैक और 20 हेरोइन की लत के चलते वहां पहुंचे। वहीं केंद्र में हर माह 20 के करीब लड़कियां भी नशा छोड़ने पहुंचती हैं। अस्पताल में लड़कियों को दाखिल करने के लिए जगह न होने के कारण उन्हें नशा छोड़ने की दवा देकर घर वापस भेज दिया जाता है।
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने राज्य के जिलों के तमाम जिला पुलिस मुखियों को आदेश दिए हुए हैं कि नशे के आदी लोगों की पहचान कर उनका मुफ्त इलाज करवाया जाए लेकिन बरनाला पुलिस की कार्यप्रणाली निराशाजनक है। अब तक एक भी व्यक्ति को इलाज के लिए दाखिल नहीं करवाया गया। अब तक जितने भी मरीज नशा छोड़ने आए वह खुद ही केंद्र में पहुंचे हैं। इसके अलावा न ही अब तक पुलिस ने किसी नशा तस्कर को ही पकड़ा है।