खराब मौसम के कारण ड्रोन को डिटेक्ट करना हालांकि मुश्किल रहता है। बावजूद इसके बीएसएफ पूरी तरह से मुस्तैद है। सीमा सुरक्षा बल नई तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे ड्रोन की गतिविधियों को पूरी तरह से रोका जा सकेगा। गौरतलब है कि नशीले पदार्थ, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल पहली बार 2019 में पंजाब में सामने आया था।
सीमा सुरक्षा बल पाकिस्तान के साथ सीमा के 553 किलोमीटर के हिस्से की रक्षा कर रहा है। बीएसएफ ने इस साल 10 ड्रोन (पिछले सप्ताह में तीन) को गिराया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई समर्थित तस्कर हाईटेक चीनी ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। ये न्यूनतम ध्वनि और उच्च स्तर पर उड़ान भरने में सक्षम हैं।
आतंकी प्रयोग कर रहे अत्याधुनिक तकनीक
देश की सुरक्षा एजेंसियों की माने तो आतंकी ड्रग व हथियारों की तस्करी में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें ट्रेस करने में भी काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। आरोपी अब वर्चुअल एप, डार्कनेट और पाकिस्तानी सिम का प्रयोग करते हैं। इससे उन्हें काबू करने में दिक्कत आती है। दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने भी अब रात के समय पूरे सूबे में हाईटेक नाके लगाने का फैसला लिया है। इसको लेकर उच्च अधिकारियों की मीटिंग में फैसला लिया जा चुका है।