विनेश फौगाट के साथ ओम प्रकाश दहिया
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देश के लिए 30 अंतरराष्ट्रीय व 80 राष्ट्रीय पहलवान को कुश्ती के दांवपेंच सिखाने वाले कोच ओमप्रकाश दहिया भी द्रोणाचार्य बन गए हैं। उनको द्रोणाचार्य अवार्ड देने की सोमवार को घोषणा हुई, जिससे कोच ओमप्रकाश काफी खुश है। क्योंकि वह पिछले 33 साल से देश के लिए पहवान तैयार कर रहे है और विनेश, अंशु, अनिल, दीपक पूनिया, प्रवीण, साजन समेत जिन 30 अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को ओमप्रकाश दहिया ने दांवपेंच सिखाए है। वह देश के लिए मेडल जीत चुके हैं और विदेशों में देश का झंडा बुलंद कर रहे हैं।
ओमप्रकाश दहिया का मानना है कि उनको काफी लंबे समय बाद द्रोणाचार्य अवार्ड मिला, लेकिन इस अवार्ड के मिलने से काफी खुशी भी हुई है। खरखौदा के रहने वाले ओमप्रकाश दहिया ने 1974 में कुश्ती के दांवपेंच खुद सीखने शुरू किए और वह नेशनल में गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज मेडल जीत चुके है। वह खुद कुश्ती छोडने के बाद देश के लिए पहलवान तैयार करने के लिए आगे आए और 1987 में साई के कोच बनकर पहलवान तैयार करने लगे। वह 2004 तक सोनीपत के सीआरजेड स्कूल में चलने वाले कुश्ती के साई सेंटर में बतौर चीफ कोच पहलवान तैयार करने में लगे रहे।
उसके बाद से खरखौदा में प्रताप स्कूल में चल रहे साई के कुश्ती के सेंटर में पहलवान तैयार कर रहे हैं। ओमप्रकाश दहिया अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर के 30 पहलवानों को कुश्ती के दांवपेंच सिखा चुके है, जिनमें विनेश, अंशु, आंशु, अनिल, राजबीर, सचिन, दीपक, राजेश, पवन, साजन, प्रवीण, मनदीप आदि शामिल है। इनके अलावा वह 80 राष्ट्रीय पहवानों को दांवपेंच सिखा चुके है और इनमें अधिकतर कई बड़े पदों पर कार्यरत है। ओमप्रकाश दहिया की इन उपलब्धियों को देखते हुए ही द्रोणाचार्य अवार्ड की घोषणा की गई है। उनके परिवार के अलावा पहवान भी काफी खुश हैं।