चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में उधारा पति नाटक का मंचन किया गया, जिसमें हंसते-हंसाते हुए सच बोलने के फायदे समझाए गए। झूठी शानो-शौकत इंसान को शुरू में आनंद और आराम देती है, लेकिन एक समय पर आकर यहीं झूठ उसके गले की फांस बन जाता है। नाटक में शामिल हरेक पंच के पीछे गहरा संदेश छिपा था। नाटक का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयरस, चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन और टैगोर थिएटर सोसाइटी ने किया।
सार्थक रंगमंच और सोशल वेलफेयर सोसाइटी, पटियाला के कलाकारों ने इस नाटक में प्रदर्शन कर वहां उपस्थित दर्शकों से काफी वाहवाही लूटी। नाटक का निर्देशन डा. लखा लेहरी ने किया। एक घंटे व पच्चीस मिनट के इस नाटक को पंजाब की कई जगहों पर पहले भी करवाया जा चुका है। इस नाटक को डां वनमाला भवालकर ने लिखा था और पंजाबी में इसका रूपांतरण लखा लेहरी ने किया। इस नाटक के मुख्य पात्र पम्मी (पत्नी) का किरदार इंदू बाला निभाती है।
उधारा पति के रोल में नवदीप सिंह कलेर, पति अशोक केरोल में अदित्य दत्ता और दादा के रोल में संजीव राय ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। पुलिस इंस्पेक्टर और चलाक पड़ोसन शीला की भूमिका में क्रमवार मनदीप सिंह और पूजा ने अपने हास्य भरपूर संवादों के जरिए दर्शकों को खूब हसाया। लाइटिंग पर हरप्रीत भुल्लर और संगीत पर अंग्रेज सिंह थेे। सेट डिजाइन लखा लेहरी ने किया था।
नाटक की मुख्य पात्र पम्मी अपने परिवार के खिलाफ जाकर भागकर एक लड़के से शादी कर लेती है। पम्मी केघर वाले जिस लड़के से उसकी शादी करवाना चाहते थे, उस लड़के से उसके चाचा की लड़की की शादी करवा दी जाती है। वह लड़का काफी अमीर होता है। लेकिन इस दौरान पम्मी अपनी चचेरी बहन से बात करती रहती है। पम्मी का पति एक अध्यापक है और वे साधारण घर में रहते है।
पम्मी अपनी चचेरी बहन को झूठ ही कह देती है कि उसका घर काफी बड़ा है और उसने नौकर भी रखे हैं,यह बात उसकी बहन सभी रिशतेदारों को बता देती है। एक दिन पम्मी को अपनी बहन से पता चलता है कि उसके दादा जी उसे और उसकेपति को मिलने उसके घर आ रहे हैं। उसके दादा जी शादी केएक साल बाद पहली बार उसके घर आ रहे थे।
उसने किराए पर उन सभी सामान को मंगवा लिया जिसका झूठ उसने अपनी बहन से बोला था, यहां तक कि किराए पर थोड़ी बहुत एक्टिंग जानने वाले दो लड़कों को भी घर में नौकर के रूप में रख लेती है। उसकेदादा जी जब घर आते हैं, तो वह अपनी हैसियत को छिपाने के लिए अनेकों झूठ बोलती है। और इसी झूठ केचक्कर में वह किराए पर लाए एक एक्टर को अपना पति बता देती है। और इस तरह अपने ही झूठ में फंसती चली जाती है। और अंत में उसे अपने झूठ को स्वीकार करना पड़ता है।