सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में कटी नाक नाटक का मंचन सोमवार को किया गया। इसका निर्देशन गुरमीत कौर ने किया। नाटक में दिखाया गया कि एक जमींदार गांव में ब्याज पर पैसे देता है और लोगों पर अत्याचार करता है। जो लोग उसके पैसे नहीं चुका पाते हैं वह उनकी जमीन और घर पर कब्जा कर लेता है।
इस तरह की हालत में जमींदार की नाक उसके चेहरे से बाहर चली जाती है। नाक को ढूंढने के लिए वह बहुत प्रयास करता है। गांव में सभी को पता चल जाता है कि उसकी नाक गायब हो गई। इस पर लोग उसे चिढ़ाते हैं। जब वह अपनी नाक को ढूंढ लेता है तो वह जमींदार से कहती है कि मैं तेरे पास नहीं आऊंगी।
तू बहुत अत्याचारी है। इस पर नाक उसे कहती है कि जिस तरह तेरा चेहरा बिना नाक के ठीक नहीं लगता, उसी तरह तू जब लोगों की जमीन छीन लेता है तो लोग परेशान होते हैं। इस पर जमींदार नाक से वादा करता है कि वह अपने आचरण में सुधार लाएगा। इसके बाद नाक वापस आ जाती है। इस नाटक का मंचन 16 कलाकारों ने किया।