स्वास्थ्य विभाग में ठेकों पर एक प्रतिशत कमीशन मांगने वाले बर्खास्त हुए स्वास्थ्य मंत्री के मामले में अब परतें खुल रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार डॉ. सिंगला की नजर सूबे में चल रहे 208 नशा केंद्रों पर थी। इधर नशे की तस्करी को रोकने में जुटी पंजाब सरकार भी नशा मुक्ति केंद्रों के ढांचे में विस्तार करने की योजना बना रही थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की कैबिनेट से बर्खास्त हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. विजय सिंगला की नजर पंजाब के नशा मुक्ति केंद्रों के कारोबार पर थी। हर साल केंद्रों में 400 करोड़ रुपये से अधिक का दवाओं और अन्य जरूरी सामानों का कारोबार किया जा रहा है। वर्तमान में 2.5 लाख नशा करने वाले मरीज पंजीकृत हैं, जबकि नशा मुक्ति केंद्रों पर 16.5 लाख मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग में ठेकों पर एक प्रतिशत कमीशन मांगने वाले बर्खास्त हुए स्वास्थ्य मंत्री के मामले में अब परतें खुल रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार डॉ. सिंगला की नजर सूबे में चल रहे 208 नशा केंद्रों पर थी। इधर नशे की तस्करी को रोकने में जुटी पंजाब सरकार भी नशा मुक्ति केंद्रों के ढांचे में विस्तार करने की योजना बना रही थी।
सरकार की मंशा थी इन केंद्रों के जरिये नशे के आदी लोगों का आसानी से इलाज किया जा सके। पंजाब सरकार ने योजना बनाई है कि जून की शुरुआत में हर 10 किलोमीटर के दायरे में एक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किया जाए। इसके लिए लगभग 300 नशा केंद्र और खोले जाने की सरकार ने मंजूरी दी है। नए नशा मुक्ति केंद्रों के खुलते ही राज्य में इनकी संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो जानी है। ऐसे में इन केंद्रों के निर्माण से लेकर दवाओं और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाना सुनिश्चित था।
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पेश से डेंटिस्ट डॉ. सिंगला इस मौके का भरपूर फायदा उठाना चाह रहे थे। इसके लिए उन्होंने अपने भतीजे प्रदीप सिंह को अहम जिम्मेदारी दी थी। डॉ. सिंगला की मंशा की जब विभाग के कुछ ईमानदार अधिकारियों को लगी तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद डॉ. सिंगला ने इन अधिकारियों को साइड लाइन करना शुरू कर दिया। वहीं से इन अधिकारियों ने सिंगला के खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू कर दी।
ब्यूप्रेनोर्फिन के जरिये होता खेल
नशे के आदी व्यक्ति को केंद्रों में नशामुक्ति दवा (ब्यूप्रेनोर्फिन) दी जाती है। अभी स्वास्थ्य विभाग के पास करीब एक महीने का भंडार है, लेकिन नशे के खिलाफ सरकार के अभियान के तहत गृह विभाग ने इसे तीन महीने का स्टाक रखने के लिए कहा है। 76 रुपये की कीमत वाली इस दवा में करोड़ों रुपये का सरकार खर्च वहन करती है।
सिंगला का रिश्तेदार नशा मुक्ति केंद्रों का बड़ा खिलाड़ी
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डॉ. सिंगला का एक करीबी रिश्तेदार सूबे में नशा मुक्ति केंद्रों का बड़ा खिलाड़ी है। सिंगला को सेहत विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद अप्रैल में ही उनकी नजदीकियां मंत्री से बढ़ने लगी थीं। अप्रैल में नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर कुछ डील भी हुईं थीं। तैयारी यह भी थी कि जल्द ही ओपिओइड उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाली ब्यूप्रेनोर्फिन गोली की खरीद की जानी थी।