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फैसले से नाखुश पीजीआई के डॉ. चक्रबती पहुंचे कैट

Wed, 12 Feb 2014 05:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई की महिला डॉक्टर को अपमानित करने के आरोप के बाद हेड आफ डिपार्टमेंट के पद से हटाने के फैसले के खिलाफ डॉ. अमिताव चक्रबती ने चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में शरण ली है।
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कैट में उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है और स्वास्थ्य मंत्रालय सहित पीजीआई के डायरेक्टर व कई डॉक्टरों को नोटिस जारी कर दिया गया है।

डा. अमिताव ने आधार बनाया है कि उन्हें साजिशन हटाया गया है, जबकि वे पूरी तरह से बेकसूर हैं। इससे उनकी छवि को काफी धक्का लगा है। कैट की ओर से पीजीआई डायरेक्टर, डॉ. अरविंद राजवंशी, डॉ. समीर मल्होत्रा, डॉ. नुसरत व स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी हुआ है।

पीजीआई ने डॉ. चक्रबती को इसी साल 15 जनवरी को पद से हटाया था। यह फैसला संस्थान ने स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से निर्देश मिलने के बाद लिया था। मंत्रालय ने यह फैसला पीजीआई की ओर से गठित जांच कमेटी के आधार पर लिया था।
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यह था मामला
करीब नौ महीने पहले फार्माकोलॉजी विभाग की एक मीटिंग आयोजित हुई। मीटिंग में विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नुसरत शफीक भी मौजूद थीं।

डॉ. नुसरत का आरोप था कि मीटिंग में सारी फेकल्टी के सामने डॉ. अमिताव चक्रबती ने उन्हें बिना किसी कारण काफी अपमानित किया। इससे वे काफी आहत हो गईं और उन्होंने इसकी शिकायत संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर वाइके चावला से की। चावला ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एक जांच कमेटी बैठाई।

जांच कमेटी में न्यूरोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जेएस चोपड़ा और डॉ. सविता मल्होत्रा को शामिल किया गया। कमेटी ने जांच के दौरान मीटिंग में मौजूद सभी डाक्टरों को बुलाया। डॉक्टरों ने गवाही दी कि मीटिंग में डा. चक्रबती का व्यवहार चौकाने वाला था। वे डॉ. नुसरत के मामले में अपनी हद पार कर गए थे।

कमेटी ने जांच में डॉ. चक्रबती को दोषी पाया और अपनी रिपोर्ट पीजीआई प्रशासन को सौंप दी। पीजीआई प्रशासन ने आगे इस रिपोर्ट को स्वास्थ्य मंत्रालय के पास भेज दी।

मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और पीजीआई प्रशासन को डॉ. चक्रबती के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।

आदेश मिलते ही पीजीआई ने डॉ. चक्रबती को पद से हटाने का फैसला लिया और उनकी जगह डॉ. अरविंद राजवंशी को विभाग के हेड आफ डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी सौंपी दी गई।
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