सीटीयू की ओर से ड्राइवरों और कंडक्टरों की आउटसोर्सिंग के लिए जारी निविदा में ड्राइविंग टेस्ट की शर्त न होने के कारण पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने यूटी प्रशासक के सलाहकार को कानूनी नोटिस भेजकर ड्राइविंग टेस्ट की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो जनहित याचिका दायर की जाएगी। नोटिस के मुताबिक प्रशासन आउटसोर्सिंग से 230 ड्राइवर और इतने ही कंडक्टर भर्ती करने की तैयारी में है।
इसके लिए निविदा जारी कर कंपनियों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ड्राइवरों का ड्राइविंग टेस्ट और स्किल टेस्ट लिया जाएगा। अरोड़ा ने कहा है कि यदि बिना टेस्ट के ड्राइवरों को रख लिया गया तो सवारियों और सड़क पर चलने वालों को हमेशा खतरा बना रहेगा और दुर्घटना भी हो सकती है।
अक्तूबर महीने में यूटी को केंद्र की योजना के मुताबिक 211 बसें मिलने वाली हैं। इन्हीं बसों के लिए ड्राइवर और कंडक्टर रखने के लिए आउटसोर्सिंग की जा रही है।
हालांकि, ड्राइविंग और स्किल टेस्ट की शर्त नहीं है, लेकिन गलती करने पर इन कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार सीटीयू ने आउटसोर्सिंग के लिए जारी निविदा में अपने पास ही रखा है। अरोड़ा का कहना है कि इससे काम नहीं चलेगा, सुरक्षा के मद्देनजर ड्राइविंग और स्किल टेस्ट जरूरी होना चाहिए।