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पीलिया खत्म नहीं तो समझें लीवर डैमेज

Fri, 04 Jul 2014 04:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के गुरनाम को पीलिया हुआ था। अच्छे डाक्टर से इलाज चला और वह ठीक हो गया। तीन से चार दिन के बाद फिर से वह बीमार पड़ गया। जांच में पता चला कि वह पीलिया का फिर से शिकार हो गया है। इस बार उसे पीजीआई रेफर किया गया।
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पीजीआई में जांच हुई तो पता चला कि गुरनाम का इम्यून सिस्टम ओवर एक्टिव हो गया और वह लीवर के सेल को डैमेज कर रहा है। जल्दी डायग्नोज से उसकी बीमारी पकड़ में आ गई और उसका इलाज शुरू हो गया। इलाज से उसकी स्थिति में सुधार आ गया है, लेकिन यदि देरी से इसका पता चलता तो शायद गुरनाम की जान बचा पाना मुश्किल होता। इम्यून सिस्टम के ओवर एक्टिव होने पर लीवर पर अटैक शुरू होता है। उससे लीवर सिरोसिस या फिर लीवर फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।

जब भी लक्षण दिखें तो न करें अनदेखी
पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ इम्यूनोपैथोलॉजी की प्रमुख प्रोफेसर रंजना के मुताबिक शरीर के ऑटो इम्यून सिस्टम के ओवर एक्टिव होने के पीछे इन्वायरमेंट फैक्टर या फिर जेनेटिक की कारण अब तक सामने आए हैं। इस डिजीज को बढ़ने से रोकने के लिए लोगों को जब भी इसके लक्षण दिखें तो इसका डाक्टर से डायग्नोज और इलाज करवाना चाहिए।
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ये लक्षण आएं तो कराएं चेकअप
इलाज के बाद भी पीलिया ठीक न हो, लगातार कमजोरी आ रही हो, शरीर में जगह-जगह खारिश हो रही, खारिश करने पर शरीर का रंग बदल रहा हो, पेट में दर्द और पानी बढ़ रहा हो, जोड़ों में दर्द हो रहा हो प्रोफेसर रंजना के मुताबिक ऑटोइम्यून डिजीज जब आती है तो अपने साथ एक बीमारी जरूर लाती है।

इसमें मरीज के लीवर डिजीज के साथ जोड़ों में दर्द, स्किन प्रॉब्लम और डायबिटीज जैसे बीमारियां भी होती हैं। जब भी पीजीआई में जोड़ों के दर्द का पेशंट आता है तो उसका एक सैंपल इम्यूनोपैथोलॉजी में भी भेज दिया जाता है। सैंपल की जांच में इस तरह के कई पेशंट देखने को मिले हैं।

महिलाओं में ज्यादा होने की संभावना
पीजीआई के डाक्टरों के मुताबिक संस्थान में आने वाले लीवर के मरीजों में 11 प्रतिशत मरीज आटो इम्यून डिजीज के होते हैं। नार्थ इंडिया में इनकी संख्या काफी है। पुरुष व बच्चों के मुकाबले महिलाओं में आटो इम्यून डिजीज होने के चांस ज्यादा रहते हैं।

पिछले 15 साल में 25 हजार मरीज सामने आ चुके हैं। पांच से दस सालों में इस तरह के केसों की संख्या बढ़ी है। दावा किया गया कि पूरे नार्थ इंडिया में पीजीआई की लैब में सबसे अच्छे तरीके से स्क्रीनिंग की जाती है। पीजीआई में इस बीमारी के लिए एक डीएनए बैंक भी बनाया गया है।

सेल बेस्ड थैरेपी बन सकती है इलाज में रामबाण
आटो इम्यून डिजीज का फिलहाल इलाज उपलब्ध नहीं है। दवाओं की मदद से इस बीमारी को मेन्टेंन जरूर किया जा सकता है। इस दिशा में अब पीजीआई कुछ जरूरी कदम उठाने जा रही है।

पीजीआई के मुताबिक इस बीमारी के लिए सेल बेस्ड थैरेपी कारगर साबित हो सकती है। इसके लिए उन्होंने मंत्रालय को 30 लाख का प्रस्ताव बनकार प्रपोजल भेजा है। हरी झंडी मिलते ही पीजीआई इस पर काम शुरू कर देगी।
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