अप्रैल से आपको घर में गैस सिलेंडर लाने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। नए वित्त वर्ष में आपको पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) का कनेक्शन घर में मिल जाएगा। चंडीगढ़ में पाइप लाइन बिछाने का काम अंतिम पड़ाव पर है। कुल लगभग 27 किमी केएरिया में से 24 किमी में पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
3 किमी एरिया में ट्रिब्यून और ट्रांसपोर्ट जैसे चौक हैं जिनमें क्रासिंग का काम रहता है। इतना ही नहीं अब प्रशासन ने प्रोजेक्ट पूरा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च तय कर दी है।
प्रशासन का दावा है कि अप्रैल में किसी भी सूरत में गैस पहुंच जाएगी। अनुमति संबंधी दिक्कतों को हल करने और आगे की योजनाओं केलिए चंडीगढ़ पोल्यूशन कंट्रोल कमेटी का सदस्य सचिव चंडीगढ़ के सदस्य दानिश अशरफ को प्रोजेक्ट का नोडल अफसर नियुक्त कर दिया गया है।
बता दें कि पंजाब के राजपुरा टर्मिनल से ट्राइसिटी के लिए गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है। यह पाइप लाइन राजपुरा से जीरकपुर होते हुए मोहाली और चंडीगढ़ आ रही है। यह प्रोजेक्ट पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड ने इंडियन ऑयल और अडानी गैस लिमिटेड (आईओएजी) को आवंटित किया हुआ है।
अभी यह स्थिति
चंडीगढ़- 27 किमी के लगभग एरिया में लाइन बिछाई जानी है। 24 किमी एरिया में बिछाई जा चुकी है। जिसमें एक या दो सेक्टरों को छोड़ बाकी सिटी को कवर किया जा चुका है। सेक्टर-49, 50 और धनास के लिए काम शुरू होने वाला है। सेक्टर-20 स्थित गुरुद्वारा चौक, ट्रिब्यून चौक और ट्रांसपोर्ट चौक पर क्रासिंग रहती है।
मोहाली- कुल 25 किमी के दायरे में पाइप लाइन बिछाई जानी है। 15 किमी से अधिक एरिया में लाइन बिछाई जा चुकी है। जीरकपुर से एयरोसिटी का बड़ा काम रहता है। इस पर काम शुरू होने वाला है।
आगे की योजना
इंडियन आयल और अडानी गैस के ज्वाइंट प्रोजेक्ट के तहत इस पाइप लाइन को ट्राइसिटी के बाद नेशनल हाईवे से होते हुए पिंजौर, परवाणू, बद्दी और नालागढ़ तक ले जाने की योजना है।
लगेंगे मीटर
इस लाइन के जरिए घरेलू, सीएनजी, कामर्शियल और इंडस्ट्रियल गैस की सप्लाई होगी। पाइप लाइन से सीधे घरों को कनेक्शन मिलेंगे। इसके लिए घरों में मीटर लगेंगे। जिनकी रीडिग केआधार पर ही बिल अदा करना होगा। घरों में मिलने वाली गैस को पीएनजी यानी पाइप नेचुरल गैस कहते हैं। जबकि इसी गैस को कंप्रेस कर दिया जाता है तो इसका नाम सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस हो जाता है। जो कॉमर्शियल वाहनों और इंडस्ट्री को दी जाती है।
सुरक्षित होती है यह गैस
यह गैस एलपीजी केमुकाबले काफी सुरक्षित होती है। एलपीजी लीकेज केबाद हवा में फैलती है जो अति ज्वलनशील होती है। जबकि प्राकृतिक गैस हवा में फैलने की बजाए जमीन की सतह पर ही रहती है। यह गैस एलपीजी की तरह खतरनाक नहीं होती।
संजीव शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर, आईओएजी ने बताया कि चंडीगढ़ के करीब 27 किमी एरिया में से 24 किमी में लाइन बिछाई जा चुकी है। कुछ जगह क्रॉसिंग बची है। जीरकपुर से एयरोसिटी का ही मेजर वर्क प्रोजेक्ट में रहता है। हाईवे पर भी काम चल रहा है। उनसे सामंजस्य स्थापित किया जा रहा है। मोहाली में भी काफी काम हो चुका है।
अजीत बालाजी जोशी, डीसी, चंडीगढ़ का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए 31 मार्च अंतिम तिथि सुनिश्चित की गई है। अप्रैल में गैस कनेक्शन दिए जाने का काम शुरू होने की उम्मीद है। अधिकारी भी अब इस प्रोजेक्ट पर पूरी नजर रखेंगे। जहां दिक्कत आएगी उसे तुरंत हल करेंगे। तीन दिन पहले ही पूरे प्रोजेक्ट पर रिव्यू मीटिंग हुई है।