फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेश में बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता के लिए बुरी खबर, जान लें नहीं बाद में पछताएंगे

Sun, 02 Sep 2018 02:16 PM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
विज्ञापन
सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
विज्ञापन
डॉलर की मार अब विद्यार्थियों पर भी पड़ने लगी। इसका असर अब लोगों के सपनों पर पड़ने लगा है। अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए विदेश भेजने वाले माता-पिता के लिए बुरी खबर है। हर साल अपने बच्चों की फीस कनाडा, ऑस्ट्रेलिया भेजने वाले अभिभावकों पर करीब 9 फीसदी अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।  
विज्ञापन


कनाडा में हर साल अकेले पंजाब से एक लाख से अधिक विद्यार्थी स्टडी वीजा पर जा रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में आंकड़ा 30 हजार के करीब है। इसके अलावा न्यूजीलैंड व यूरोपियन देशों के प्रति पंजाबी विद्यार्थियों का रुझान तेजी से बढ़ा है। कनाडा ने हाल ही में अपने नियमों में बदलाव करते हुए विद्यार्थियों को पूरे साल की फीस एक मुश्त देने का आदेश जारी किया है। हर साल कॉलेज के लिए विद्यार्थी की फीस 10 लाख भारतीय मुद्रा के करीब बनती है। इसके अलावा विद्यार्थियों को कनाडा बैंक में जीआईसी खाता भी खुलवाना पड़ता है, जिसमें पांच लाख भारतीय करेंसी कनाडा डालर में बदलकर जमा करवाई जाती है। 
विज्ञापन

डेमो - फोटो : डेमो
हाल ही में अमेरिकन डॉलर जिस तेजी से उछलने लगा है, उससे उन अभिभावकों की चिंता बढ़ गयी है, जिनके बच्चे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोपियन देशों के अलावा अमेरिका या यूके में पढ़ रहे हैं। अमेरिकन डॉलर की कीमतों का असर कनाडा डॉलर पर भी पड़ा है। जहां पहले कनाडा का डॉलर 50 रुपये के करीब था, अब 54 रुपये पहुंच गया है। इस तरह से  विद्यार्थी को कनाडा फीस भेजनी है तो 80 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे, वहीं जीआईसी खाता खुलवाने के लिए भी 40 हजार अतिरिक्त अदा करने होंगे। 

इसी तरह से कनाडा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों पर हर साल दो लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। कनाडा में सितंबर, जनवरी में दो बार दाखिला होता है। इन दिनों जनवरी के दाखिले की प्रक्रिया चल रही है और अभिभावकों का बजट व गणित गड़बड़ा रहा है। आस्ट्रेलियन डॉलर की कीमत 49 से उठकर 52 रुपये तक पहुंच गई है। अब तीन रुपये प्रति डॉलर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। दिक्कत उन विद्यार्थियों के लिए अधिक हो गई है, जिनकी फीस भारत से जाती है और या वह दाखिला लेकर जाने की तैयारी कर रहे हैं।   

एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज एजुकेशन कंसल्टेंट के पूर्व प्रधान सुकांत त्रिवेदी का कहना है कि कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जाने वाले विद्यार्थियों पर काफी असर पड़ा है। पूरा बजट परिवार की तरफ से तैयार किया होता है। अब अचानक 1.5 लाख का अतिरिक्त बोझ कैसे सहन होगा ? लोग शिकायतें तो करते हैं लेकिन इसका हल नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें