चंडीगढ़। सेक्टर-38 वेस्ट के नए एसपीसीए शेल्टर में जानवरों की बदहाल स्थिति पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए और खुद एसपीसीए के पशु चिकित्सकों ने स्वीकार किया कि शेल्टर में रखे करीब 47 कुत्तों की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो रहीं।
जस्टिस अलका सरीन की अदालत में डॉक्टरों ने बताया कि एक औसत 20 किलोग्राम वजन वाले कुत्ते को प्रतिदिन लगभग 150 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है जो करीब चार से पांच अंडों के बराबर है जबकि शेल्टर में सुबह के भोजन में 45-47 अंडे और शाम को भी 45-47 अंडे मिलाए जाते हैं। इस तरह कुल 90-94 अंडे 47 कुत्तों में बांटे जा रहे हैं यानी प्रति कुत्ता लगभग दो अंडे प्रतिदिन ही मिल रहे हैं। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों के अपने आंकड़ों से ही स्पष्ट है कि कुत्तों की आवश्यक पोषण जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि एसपीसीए के कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला। लोकल कमिश्नर अधिवक्ता श्रुति शर्मा ने अदालत को बताया कि वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे और जानवरों की देखभाल प्रभावित हो रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया कि एसपीसीए को पहले ही आर्थिक सहायता जारी की जा चुकी है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में एसपीसीए की 31 मार्च 2024 तक की ऑडिट रिपोर्ट भी पेश की। इसके अनुसार कुल वार्षिक खर्च 1.22 करोड़ रुपये था। इसमें वेतन पर खर्च 1.09 करोड़ रुपये (करीब 90%) था। जानवरों के भोजन पर खर्च 3.53 लाख रुपये व चिकित्सा खर्च: 57,565 रुपये है। अदालत ने 10 मार्च को नियुक्त लोकल कमिश्नर श्रुति शर्मा की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ले ली। रिपोर्ट के साथ कई तस्वीरें भी अदालत में पेश की गईं, जिनमें घायल कुत्ते और भोजन के बर्तन दिखाई दे रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने एसपीसीए की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की थी। इस पर अदालत ने आदेश दिया कि लोकल कमिश्नर को सीसीटीवी फुटेज तक पूरी पहुंच दी जाएगी, ताकि अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि फुटेज को सार्वजनिक करने या याचिकाकर्ताओं से साझा करने की अनुमति नहीं होगी। डॉ. प्रतीक बलाना ने अदालत को विश्वास दिलाया कि सभी सीसीटीवी कैमरे लगातार चालू रहेंगे, फुटेज कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखी जाएगी, स्वस्थ और गैर-आक्रामक कुत्तों को पिंजरों में बंद नहीं रखा जाएगा और उन्हें सुबह-शाम खुला छोड़ा जाएगा। हाईकोर्ट ने एसपीसीए को निर्देश दिया कि वह जानवरों की पोषण जरूरतें पूरी करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का हलफनामा दाखिल करे। मामला उस समय सामने आया जब फरवरी में एक रिपोर्ट में बताया गया कि रायपुर कलां एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में एक गर्भवती आवारा कुत्ते को करीब 60 दिन तक पिंजरे में बंद रखा गया। तनाव और खराब देखभाल के कारण उसने वहीं पिल्लों को जन्म दिया और एक पिल्ले को खा लिया जबकि दूसरे को घायल कर दिया।